“डामर की सड़क या भ्रष्टाचार की परत? खेदापाली–लाला माता मार्ग निर्माण पर गंभीर सवाल”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
निर्माण के साथ ही उखड़ रही सड़क, ग्रामीणों का आरोप—‘गुणवत्ता से समझौता, जिम्मेदार मौन’
कुड़ेकेला/छाल (रायगढ़)।
विकास के नाम पर खर्च हो रही सरकारी राशि पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। छाल क्षेत्र में खेदापाली पत्ता गोदाम से लाला माता मंदिर तक बन रही लगभग ढाई किलोमीटर लंबी डामर सड़क निर्माण कार्य अब गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में घिर गया है। स्थिति यह है कि जहां एक ओर सड़क निर्माण का काम जारी है, वहीं दूसरी ओर कुछ ही घंटों में डामर की परतें उखड़ने लगी हैं। इससे निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि सड़क की हालत देखकर यह समझ पाना मुश्किल है कि निर्माण कार्य हो रहा है या सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। कई जगहों पर डामर की परत इतनी कमजोर दिखाई दे रही है कि सामान्य उपयोग में ही टूटने लगी है।
मानकों पर सवाल, ज़मीनी हकीकत अलग
सूत्रों के अनुसार, यह सड़क एसईसीएल के अंतर्गत निर्धारित तकनीकी मानकों के तहत बनाई जानी है, जिसमें 50 मिमी कॉम्पैक्ट लेयर और 20 मिमी सीलकोट का प्रावधान है। लेकिन मौके पर जो स्थिति दिख रही है, वह इन मानकों के अनुरूप नहीं मानी जा रही।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
अनुबंध एक के नाम, काम दूसरे के भरोसे?
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि सड़क निर्माण का अनुबंध राजेश अग्रवाल के नाम पर है, जबकि मौके पर कार्य किसी अन्य व्यक्ति—ऋतिक गोयल—द्वारा कराया जा रहा है।
पेटी कॉन्ट्रैक्ट के इस मॉडल में जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है, जिसका सीधा असर निर्माण की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
अधिकारी नदारद, ठेकेदार बेलगाम
निर्माण स्थल पर विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमानुसार ऐसे कार्यों में इंजीनियर या जिम्मेदार अधिकारी की नियमित निगरानी आवश्यक होती है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि मौके पर किसी अधिकारी की मौजूदगी नजर नहीं आ रही।
इस स्थिति में ठेकेदार द्वारा मनमानी किए जाने की आशंका और मजबूत हो जाती है।
जनता में आक्रोश, जांच की मांग तेज
सड़क बनते ही टूटने की घटनाओं से क्षेत्र के लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह सड़क लंबे समय तक उपयोग के लायक नहीं रह पाएगी और सरकारी धन की बर्बादी होगी।
यह मामला केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यापक चुनौती को भी उजागर करता है।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होती है या यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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