दीपों के पर्व पर साक्षरता का संकल्प, रायगढ़ में जलेगा शिक्षा का उजियारा
दीपावली की पूर्व संध्या पर जिलेभर में चलेगा ‘एक दीप साक्षरता का’ अभियान, निरक्षर वयस्कों को शिक्षा से जोड़ने की पहल
शासकीय स्कूलों, छात्रावासों और साक्षरता केंद्रों में होगा दीप प्रज्ज्वलन, शाम 6:30 से 7:30 बजे तक आयोजित होंगी जागरूकता गतिविधियां
रायगढ़, 3 नवंबर 2026। दीपावली का पर्व घर-आंगन को रोशन करने के साथ ही खुशियां बांटने का अवसर भी होता है। इस बार रायगढ़ जिले में दीपों के इसी पर्व को एक सामाजिक संकल्प से जोड़ने की तैयारी है। जिले में दीपावली की पूर्व संध्या पर ‘एक दीप साक्षरता का’ अभियान चलाया जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को शिक्षा का महत्व समझाने और निरक्षर वयस्कों को पढ़ने-लिखने की मुख्यधारा से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य के तहत उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत यह विशेष जनजागरूकता पहल की जा रही है। अभियान के दौरान जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दीपावली के पारंपरिक दीपों के साथ साक्षरता के नाम पर भी एक दीप प्रज्ज्वलित किया जाएगा। इसके जरिए यह संदेश देने का प्रयास होगा कि जिस तरह एक दीप अंधकार को दूर करता है, उसी तरह शिक्षा व्यक्ति के जीवन में जागरूकता, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की राह खोलती है।
स्कूलों से लेकर गांवों और वार्डों तक पहुंचेगा अभियान
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दीपावली से एक दिन पहले शाम 6:30 बजे से 7:30 बजे तक जिले के शासकीय विद्यालयों, छात्रावासों, विकासखंड कार्यालयों तथा उल्लास साक्षरता केंद्रों में दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान उपस्थित लोगों को साक्षरता के प्रसार और निरक्षर वयस्कों को शिक्षा से जोड़ने की शपथ भी दिलाई जाएगी।
अभियान को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का स्वरूप देने की तैयारी है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों को साथ लेकर गांव-गांव तथा शहरी वार्डों तक जागरूकता पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की गई है।
कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए निर्देश
कलेक्टर एवं जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अध्यक्ष मयंक चतुर्वेदी ने अभियान के प्रभावी आयोजन के लिए जिले के सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के तहत विकासखंड स्तर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के माध्यम से गणमान्य नागरिकों से अपील जारी की जाएगी। आम लोगों से आग्रह किया जाएगा कि वे दीपावली पर एक दीप साक्षरता के नाम जलाएं और अपने आसपास ऐसे वयस्कों की पहचान कर उन्हें पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करें, जो अब तक शिक्षा से वंचित हैं।
शिक्षक और स्वयंसेवक निभाएंगे अहम भूमिका
अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए शिक्षा विभाग की मैदानी व्यवस्था को भी सक्रिय किया जा रहा है। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा बीआरसी, एबीओ, संकुल समन्वयकों, हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों तथा ग्राम और वार्ड प्रभारियों के साथ यू-ट्यूब के माध्यम से वेबिनार आयोजित किए जाएंगे।
संकुल समन्वयकों, ग्राम प्रभारियों और वार्ड प्रभारियों के माध्यम से उल्लास एप पर पंजीकृत स्वयंसेवी शिक्षकों तथा असाक्षर व्यक्तियों को अभियान से जोड़ा जाएगा। स्वयंसेवी शिक्षक स्थानीय स्तर पर लोगों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराने के साथ ही निरक्षर वयस्कों को पढ़ने-लिखने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
इस पहल में शिक्षकों और स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि साक्षरता का वास्तविक विस्तार तभी संभव है, जब शिक्षा का संदेश सरकारी संस्थानों से निकलकर प्रत्येक गांव, मोहल्ले और परिवार तक पहुंचे।
सोशल मीडिया पर भी साझा होंगी गतिविधियां
अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया का भी उपयोग किया जाएगा। जिले में आयोजित दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रमों के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #ULLASDipawali और #SaksharChhattisgarh हैशटैग के साथ साझा किए जाएंगे। इसके अलावा समाचार पत्रों के माध्यम से भी लोगों तक अभियान का संदेश पहुंचाया जाएगा।
संबंधित अधिकारियों को विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रम आयोजित करने तथा गतिविधियों की जानकारी फोटोग्राफ्स सहित जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
एक दीप से आगे बढ़ेगा साक्षरता का संकल्प
दरअसल, साक्षरता का अर्थ केवल अक्षर पहचानना या अपना नाम लिख पाना नहीं है। पढ़ने-लिखने की क्षमता व्यक्ति को अपने अधिकारों, सरकारी योजनाओं, सामाजिक जिम्मेदारियों और रोजमर्रा के निर्णयों को बेहतर ढंग से समझने में सक्षम बनाती है। ऐसे में ‘एक दीप साक्षरता का’ अभियान दीपावली के उत्सव को एक व्यापक सामाजिक उद्देश्य से जोड़ने की पहल है।
अब इस अभियान की सार्थकता इस बात से तय होगी कि दीप प्रज्ज्वलन और जागरूकता कार्यक्रमों के बाद कितने निरक्षर वयस्क वास्तव में पढ़ाई से जुड़ पाते हैं। यदि एक परिवार भी किसी निरक्षर सदस्य को शिक्षा की राह पर आगे बढ़ाने का संकल्प लेता है, तो यह पहल अपने उद्देश्य की दिशा में सार्थक कदम साबित हो सकती है।
रायगढ़ में इस बार दीपावली पर जलने वाला साक्षरता का दीप केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि शिक्षा से वंचित लोगों तक ज्ञान का उजाला पहुंचाने की सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश लेकर आएगा।
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