पटवारियों की हड़ताल पर प्रशासन का सख्त रुख, प्रांताध्यक्ष भागवत कश्यप निलंबित; काम पर लौटने के लिए जारी हुआ अल्टीमेटम

रायगढ़। राजस्व विभाग और पटवारी संघ के बीच पिछले करीब 20 दिनों से जारी टकराव अब सीधे प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। डिजिटल क्रॉप सर्वे और पीवी एप के जरिए फसलों के भौतिक सत्यापन को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। इसी बीच प्रशासन ने पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष भागवत कश्यप को निलंबित कर दिया है। दूसरी ओर रायगढ़ अनुविभाग के अंतर्गत रायगढ़ और पुसौर क्षेत्र के पटवारियों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आदेश की अनदेखी कर हड़ताल जारी रखने पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
करीब तीन सप्ताह से जारी पटवारियों के कलमबंद और कामबंद आंदोलन के कारण जिले की राजस्व व्यवस्था पर असर पड़ने लगा है। एक ओर पटवारी अपनी मांगों और कार्यप्रणाली से जुड़ी आपत्तियों को लेकर आंदोलनरत हैं, तो दूसरी ओर प्रशासनिक मशीनरी ने सरकारी कामकाज में आ रही बाधाओं को देखते हुए सख्ती बरतनी शुरू कर दी है।
पीवी एप से फसल सत्यापन का विरोध बना विवाद की प्रमुख वजह
मामले की शुरुआत पीवी एप के माध्यम से फसलों का भौतिक सत्यापन किए जाने को लेकर पटवारियों की आपत्तियों से हुई। पटवारियों ने इस प्रक्रिया पर असहमति जताते हुए काम बंद आंदोलन शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह विरोध प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप लेता गया।
पटवारियों की हड़ताल का सीधा असर उन सरकारी कामों पर पड़ रहा है, जिनका संबंध किसानों, भूमिस्वामियों और आम नागरिकों से है। डिजिटल क्रॉप सर्वे, गिरदावरी, धान खरीदी से संबंधित राजस्व प्रक्रियाएं, लोक सेवा गारंटी के तहत मिलने वाली सेवाएं और सीएम हेल्पलाइन के प्रकरण प्रभावित होने की बात सामने आई है।
प्रशासन की चिंता इस बात को लेकर भी है कि धान खरीदी का महत्वपूर्ण समय होने के कारण फसल और रकबे से संबंधित रिकॉर्ड का अद्यतन रहना जरूरी है। ऐसे में पटवारियों की अनुपस्थिति से किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पुराने विभागीय प्रकरण में घिरे प्रांताध्यक्ष, जवाब नहीं देने पर हुई कार्रवाई
पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष भागवत कश्यप का निलंबन केवल मौजूदा हड़ताल से जुड़ा मामला नहीं बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जब वे मुकडेगा में पदस्थ थे, उस दौरान उनके कार्यों में कथित लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और विभागीय अनियमितताओं को लेकर प्रशासन ने सितंबर 2026 में कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
यह मामला 27 जनवरी 2025 से 28 फरवरी 2025 के बीच उनकी मुकडेगा में पदस्थापना अवधि से संबंधित बताया गया है। नोटिस के जवाब में भागवत कश्यप ने अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने को प्रशासन ने शासकीय सेवा नियमों के प्रतिकूल माना।
इसके बाद एसडीएम रायगढ़ ने शुक्रवार को निलंबन आदेश जारी कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान भागवत कश्यप का मुख्यालय तहसील कार्यालय की कानूनगो शाखा निर्धारित किया गया है।
हालांकि, विभागीय नोटिस में लगाए गए आरोपों और उन पर संबंधित कर्मचारी के पक्ष को भी निष्पक्ष रिपोर्टिंग के तहत सामने रखा जाना आवश्यक है।
संघ ने बताया पदाधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश
दूसरी ओर पटवारी संघ इस कार्रवाई को सामान्य विभागीय प्रक्रिया के बजाय आंदोलन के बीच दबाव बनाने की कार्रवाई के रूप में देख रहा है। संघ की ओर से आरोप लगाया गया है कि सरकार और प्रशासन आंदोलन को कमजोर करने के लिए संगठन के पदाधिकारियों को निशाना बना रहे हैं।
भागवत कश्यप को नोटिस जारी किए जाने के समय भी संघ ने इसका विरोध किया था। अब प्रांताध्यक्ष के निलंबन के बाद प्रशासन और पटवारी संगठन के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की आशंका है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासनिक सख्ती से पटवारी काम पर लौटेंगे या फिर यह कार्रवाई आंदोलन को और व्यापक रूप देगी?
रायगढ़ और पुसौर के पटवारियों को तत्काल काम पर लौटने का आदेश
एसडीएम रायगढ़ ने रायगढ़ और पुसौर क्षेत्र के पटवारियों को तत्काल अपने शासकीय दायित्वों पर लौटने के निर्देश दिए हैं। आदेश में चेतावनी दी गई है कि हड़ताल जारी रखने और काम पर वापस नहीं आने की स्थिति में आंदोलन की अवधि को सेवा में अवरोध अथवा ब्रेक इन सर्विस के रूप में दर्ज किया जा सकता है।
इसके साथ ही संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि राजस्व विभाग से जुड़े जरूरी कामकाज को अनिश्चितकाल तक बाधित नहीं रहने दिया जा सकता। वहीं पटवारी संघ की आपत्तियों और मांगों का समाधान निकाले बिना विवाद समाप्त होना भी आसान नहीं दिख रहा है।
किसानों के सामने खड़ा हो सकता है दोहरा संकट
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू किसानों से जुड़ा है। एक तरफ खरीफ फसल की गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसे कार्य महत्वपूर्ण हैं, तो दूसरी तरफ धान खरीदी की तैयारियों में सही फसल और रकबे का रिकॉर्ड जरूरी होता है।
यदि प्रशासन और पटवारी संघ के बीच गतिरोध लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा। किसानों को फसल संबंधी रिकॉर्ड में सुधार, राजस्व प्रमाण पत्र, सीमांकन और अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी परेशान होना पड़ सकता है।
फिलहाल रायगढ़ में प्रशासनिक सख्ती और पटवारी संघ के विरोध के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पटवारी प्रशासन के आदेश के बाद काम पर लौटते हैं या आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लेते हैं। इस विवाद का समाधान बातचीत और प्रशासनिक समन्वय से निकलता है या अनुशासनात्मक कार्रवाई का दायरा बढ़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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