बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती हलचल से छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम, 3-4 नवंबर को बारिश और तेज हवाओं के आसार; धान की फसल पर मंडराया खतरा

40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं, झोंकों में 60 किमी तक पहुंचने की संभावना; खेतों में खड़ी और कटाई के बाद रखी फसल को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता
रायपुर। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली का असर अब मध्य भारत के मौसम पर भी दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है। चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ से जुड़ी मौसमी गतिविधियों के चलते छत्तीसगढ़ में आगामी 3 और 4 नवंबर को मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। इस दौरान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने के आसार हैं। हवाओं की सामान्य रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने तथा कुछ स्थानों पर झोंकों की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना बताई गई है।
मौसम में संभावित बदलाव ने प्रदेश के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इसकी वजह भी साफ है। नवंबर का पहला सप्ताह धान की कटाई और खरीदी की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। कई इलाकों में धान की फसल अभी खेतों में खड़ी है, वहीं कुछ स्थानों पर कटाई के बाद उपज खेतों या खलिहानों में रखी हुई है। ऐसे समय में बारिश और तेज हवाएं किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती हैं।
दक्षिण भारत से छत्तीसगढ़ तक दिख सकता है मौसमी सिस्टम का असर
मौसम संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती मौसमी प्रणाली के प्रभाव से सबसे पहले आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के कई क्षेत्रों में मौसम प्रभावित होने की संभावना है। 2 और 3 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तेलंगाना में भारी से अतिभारी बारिश की आशंका जताई गई है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है।
मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने के साथ 3 और 4 नवंबर को छत्तीसगढ़ तथा दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। प्रदेश में बारिश की गतिविधियों के साथ तेज हवा और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
रायपुर में बादलों की आवाजाही, अगले दो दिन अहम
राजधानी रायपुर में 2 नवंबर से ही मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। आसमान में बादलों की आवाजाही बढ़ने और शाम के समय हल्की बारिश अथवा बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। इसके बाद 3 और 4 नवंबर को बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
हालांकि, बारिश का प्रभाव प्रदेश के सभी जिलों में एक समान रहेगा, यह कहना फिलहाल उचित नहीं होगा। अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की स्थिति स्थानीय परिस्थितियों और मौसमी प्रणाली की दिशा पर निर्भर करेगी।
खेतों में खड़ी फसल के साथ खलिहान में रखे धान की भी बढ़ी चिंता
इस संभावित मौसम परिवर्तन का सबसे सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है। धान की कटाई के समय होने वाली बारिश से खेतों में खड़ी फसल के गिरने, बालियों के भीगने और दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है। वहीं कटाई के बाद खुले स्थानों पर रखे धान में नमी बढ़ने से उसके सुरक्षित भंडारण की समस्या पैदा हो सकती है।
छत्तीसगढ़ के धान उत्पादक क्षेत्रों में इस समय किसान खरीफ सीजन की उपज को घर और खरीदी केंद्रों तक पहुंचाने की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में तेज हवाओं और बारिश की स्थिति बनने पर कटाई, मिंजाई, परिवहन और भंडारण की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मौसम की अनिश्चितता के बीच तैयार फसल को सुरक्षित कैसे रखा जाए। यदि बारिश की गतिविधियां बढ़ती हैं तो खुले में रखी उपज को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना जरूरी होगा।
तेज हवा, बिजली और बारिश के दौरान सावधानी जरूरी
संभावित खराब मौसम को देखते हुए लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। तेज हवाएं चलने के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर छतों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए। आकाशीय बिजली चमकने पर खुले मैदान, खेत और जलाशयों के आसपास रहने से बचें। बारिश के दौरान बिजली के उपकरणों और खुले तारों से दूरी बनाए रखें।
किसानों के लिए भी जरूरी है कि कटाई के बाद रखी गई फसल को तिरपाल अथवा सुरक्षित भंडारण व्यवस्था से ढककर रखें। मौसम की ताजा स्थिति और स्थानीय प्रशासन की सलाह के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं।
फिलहाल 3 और 4 नवंबर की मौसम गतिविधियों पर निगाहें टिकी हुई हैं। यदि अनुमान के मुताबिक प्रदेश में बारिश और तेज हवाओं का दौर बनता है तो इसका असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धान की फसल और खरीफ सीजन की कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अगले दो दिन किसानों और प्रशासन, दोनों के लिए सतर्कता और तैयारी की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
नोट: यह खबर उपलब्ध मौसम संबंधी रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। जिलेवार चेतावनी, वर्षा की संभावना और हवा की गति की पुष्टि के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम बुलेटिन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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