Latest News

अब स्टेशन के चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति! रेलवे शुरू करेगा ‘घर से घर तक’ पार्सल सेवा, मोबाइल ऐप से होगी बुकिंग और डिलीवरी

http://amarkhabar.com

रायपुर। भारतीय रेलवे अपनी पार्सल परिवहन व्यवस्था को नए दौर में ले जाने की तैयारी कर रहा है। रेलवे की प्रस्तावित ‘रेल पार्सल ऐप – घर से घर तक’ सेवा शुरू होने के बाद लोगों को सामान भेजने के लिए रेलवे स्टेशन के पार्सल काउंटर तक जाने और लंबी कतारों में लगने की परेशानी से राहत मिल सकती है। इस व्यवस्था में मोबाइल ऐप के माध्यम से पार्सल बुकिंग से लेकर घर से सामान उठाने और गंतव्य तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल बनाने की योजना है।

इस पहल का उद्देश्य रेलवे की पारंपरिक पार्सल सेवा को आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है। खास बात यह है कि इस पूरी व्यवस्था में रेलवे के साथ निजी लॉजिस्टिक्स कंपनियां भी भागीदार के रूप में काम करेंगी। इससे रेलवे का विशाल रेल नेटवर्क और निजी कंपनियों का डोरस्टेप परिवहन तंत्र एक साथ जुड़ सकेगा।

तीन चरणों में घर से गंतव्य तक पहुंचेगा सामान

प्रस्तावित व्यवस्था में पार्सल परिवहन को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। पहले चरण को ‘फर्स्ट माइल’ कहा गया है। इसमें निजी लॉजिस्टिक्स कंपनी ग्राहक के घर, दुकान अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान से सामान एकत्रित कर नजदीकी रेलवे स्टेशन तक पहुंचाएगी।

दूसरे चरण यानी ‘मिडिल माइल’ में रेलवे की जिम्मेदारी होगी। सामान को निर्धारित ट्रेन के माध्यम से गंतव्य रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया जाएगा। तीसरे चरण को ‘लास्ट माइल’ नाम दिया गया है। इसमें गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने के बाद स्थानीय लॉजिस्टिक्स पार्टनर पार्सल प्राप्त करेगा और उसे सीधे संबंधित व्यक्ति के घर या बताए गए पते पर पहुंचाएगा।

इस प्रकार ग्राहक को न तो सामान लेकर स्टेशन जाने की जरूरत होगी और न ही गंतव्य स्टेशन से पार्सल लेने के लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ेगी। हालांकि घर से पिकअप और घर तक डिलीवरी की सुविधा वैकल्पिक रखी जाएगी। ग्राहक चाहें तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्वयं भी स्टेशन पर सामान जमा कर सकते हैं।

मोबाइल ऐप और वेबसाइट से होगी बुकिंग, कागजी प्रक्रिया होगी कम

रेलवे की योजना के मुताबिक यह सुविधा एंड्रॉयड और आईओएस मोबाइल प्लेटफॉर्म के साथ वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराने की तैयारी है। ग्राहक मोबाइल के माध्यम से पार्सल की जानकारी दर्ज कर बुकिंग कर सकेंगे।

नई व्यवस्था में डिजिटल फॉरवर्डिंग नोट को ही आवश्यक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। इससे पारंपरिक कागजी प्रक्रिया में कमी आएगी। पार्सल की डिलीवरी के दौरान डिजिटल रसीद और ओटीपी आधारित सत्यापन व्यवस्था अपनाई जाएगी, जिससे सामान सही प्राप्तकर्ता तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

भुगतान की प्रक्रिया भी एकीकृत रखी जाएगी। रेल परिवहन शुल्क के साथ घर से पिकअप और गंतव्य तक डिलीवरी का निर्धारित शुल्क एक ही बार में यूपीआई, डेबिट या क्रेडिट कार्ड तथा नेट बैंकिंग के माध्यम से जमा किया जा सकेगा।

हालांकि सामान भेजने वाले ग्राहकों को पैकिंग की जिम्मेदारी निभानी होगी। पार्सल को मजबूत डिब्बे, ट्रंक, टोकरी अथवा बोरी में सुरक्षित तरीके से पैक करके देना होगा, ताकि परिवहन के दौरान सामान को नुकसान न पहुंचे।

पहले आठ महानगरों में शुरुआत, रायपुर और बिलासपुर तक विस्तार की तैयारी

रेलवे की प्रस्तावित योजना के अनुसार सेवा का शुरुआती संचालन देश के आठ प्रमुख शहरों में किया जाना है। इनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलूरु और पुणे शामिल हैं।

शुरुआती चरण के अनुभव और संचालन व्यवस्था के आधार पर इस सेवा का विस्तार दूसरे शहरों तक किया जाएगा। इसी क्रम में भविष्य में छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को भी इस सुविधा से जोड़ने की योजना बताई गई है।

यदि यह व्यवस्था निर्धारित योजना के अनुसार लागू होती है, तो छत्तीसगढ़ के व्यापारियों, छोटे कारोबारियों और आम नागरिकों को भी इसका लाभ मिल सकता है। विशेषकर ऐसे लोगों के लिए यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें नियमित रूप से दूसरे शहरों में व्यावसायिक सामान, मशीनरी के छोटे पुर्जे अथवा अन्य पार्सल भेजने पड़ते हैं।

रायपुर से रोजाना भेजे जा रहे 1100 से अधिक पार्सल

रायपुर रेलवे स्टेशन पर पार्सल कारोबार का आकार भी इस सेवा की संभावित उपयोगिता को दर्शाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रायपुर रेलवे पार्सल काउंटर से प्रतिदिन औसतन 435 सामान की बुकिंग होती है। इसके अतिरिक्त लीज कंपनियों के माध्यम से रोजाना लगभग 650 पार्सल बुक किए जाते हैं।

इस तरह रायपुर से प्रतिदिन 1100 से अधिक पार्सल भेजे जाने का अनुमान है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस कारोबार से रेलवे को प्रतिमाह लगभग 26 लाख रुपये की आय होती है।

वहीं दस्तावेजों में रायपुर मंडल को वित्तीय वर्ष 2025-26 में पार्सल सेवा से 7.44 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का उल्लेख किया गया है। हालांकि इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि के संबंध में संबंधित अधिकारी एसीएम शेषमणि पांडेय से संपर्क किए जाने पर उन्होंने इस डेटा की जानकारी होने से इनकार किया।

छोटे व्यापारियों के लिए खुल सकते हैं नए रास्ते

रेलवे की यह पहल केवल पार्सल बुकिंग को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं है। यदि पिकअप, रेल परिवहन और अंतिम डिलीवरी की व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित होती है, तो छोटे व्यापारियों को देश के विभिन्न शहरों में सामान भेजने के लिए एक अतिरिक्त परिवहन विकल्प मिल सकता है।

अब तक रेलवे पार्सल सेवा का उपयोग करने के लिए लोगों को स्टेशन तक सामान पहुंचाने और गंतव्य पर उसकी प्राप्ति की व्यवस्था करनी पड़ती थी। प्रस्तावित डोर-टू-डोर मॉडल इस पूरी प्रक्रिया को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

हालांकि इस सेवा की वास्तविक सफलता बुकिंग शुल्क, डिलीवरी की समय-सीमा, सामान की सुरक्षा, क्षतिपूर्ति की व्यवस्था और निजी लॉजिस्टिक्स कंपनियों के संचालन की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।

फिलहाल यह रेलवे की प्रस्तावित योजना है। रायपुर और बिलासपुर में सेवा शुरू होने की निश्चित तारीख तथा स्थानीय स्तर पर लागू होने वाली शुल्क व्यवस्था को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।

See also  “निष्पक्ष कलम को राष्ट्रीय सम्मान: सुधीर चौहान को ‘नेशनल एडिटर गौरव अवॉर्ड’, पत्रकारिता की साख को मिला नया संबल”

अन्य अधिक खबरों के लिए स्क्रॉल डाउन करें 👇⬇️

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button