गुजरात के शाह परिवार से जुड़ा पूरा मामला, जानें सिक्रेट बॉक्स में मिले 4 करोड़ किसके ? कोर्ट में आवेदन से हुआ खुलासा…आयकर जांच के बीच कोर्ट का बड़ा फैसला

दुर्ग। खुर्सीपार में एक खाली पिकअप वाहन के भीतर बनाए गए सीक्रेट बॉक्स से बरामद करीब चार करोड़ रुपये की गुत्थी फिलहाल सुलझती नजर नहीं आ रही है। रकम पर मालिकाना हक जताते हुए शाह परिवार की ओर से न्यायालय में दायर सुपुर्दनामा आवेदन को खारिज कर दिया गया है। न्यायालय के इस फैसले से जब्त नकदी वापस पाने की परिवार की कोशिश को झटका लगा है। वहीं, रकम के स्रोत और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच अब भी अहम बनी हुई है।
मामला 25 अक्टूबर 2026 का है, जब खुर्सीपार पुलिस ने एक खाली पिकअप वाहन की तलाशी के दौरान उसमें बनाए गए गुप्त बॉक्स से लगभग चार करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे। वाहन में छिपाकर रखी गई इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने नकदी जब्त कर जांच शुरू की थी। मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी उठने लगा था कि आखिर इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।
शाह परिवार ने व्यवसाय और आयकर रिकॉर्ड को बनाया आधार
जब्त रकम वापस पाने के लिए कमलेश आर. शाह निवासी गांधीनगर, गुजरात तथा खुशबू शाह और खुशाली शाह की ओर से न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन में रकम पर अपना अधिकार जताते हुए पारिवारिक व्यवसाय और वित्तीय दस्तावेजों का हवाला दिया गया।
आवेदकों की ओर से बताया गया कि कमलेश शाह की पत्नी नीना कमलेश शाह अपने जीवनकाल में ‘मेसर्स मेक टेक’ नाम से कृषि आधारित विभिन्न व्यवसाय संचालित करती थीं। फर्म का पंजीयन भारत सरकार के उद्योग विभाग में होने और बड़े पैमाने पर कारोबार किए जाने का दावा भी आवेदन में किया गया।
दस्तावेजों के आधार पर यह तर्क रखा गया कि फर्म नियमित रूप से आयकर जमा करती रही है तथा उसका वित्तीय ऑडिट भी कराया जाता है। आवेदन में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 1,08,22,242 रुपये आयकर जमा किए जाने का उल्लेख किया गया। इसके अलावा फर्म की आर्थिक स्थिति, नगद एवं बैंक जमा राशि तथा नागपुर स्थित कार्यालय से संबंधित दस्तावेज भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
नीना शाह के निधन के बाद बेटियों ने जताया उत्तराधिकार का दावा
आवेदन में यह भी बताया गया कि फर्म की संचालिका नीना कमलेश शाह का वर्ष 2025 में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद उनकी पुत्रियां खुशबू शाह और खुशाली शाह विधिक उत्तराधिकारी हैं। इसी आधार पर परिवार की ओर से जब्त की गई लगभग चार करोड़ रुपये की राशि उन्हें सुपुर्द किए जाने की मांग की गई थी।
अभियोजन पक्ष ने जताई आपत्ति, आयकर जांच का दिया हवाला
नकदी सुपुर्द किए जाने के आवेदन का अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया। अभियोजन की ओर से चार अधिवक्ताओं ने न्यायालय में आपत्ति प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब्त रकम के संबंध में आयकर विभाग की जांच प्रारंभ हो चुकी है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले नकदी आवेदकों को सौंपना उचित नहीं होगा। इससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई।
अभियोजन पक्ष की आपत्तियों और आवेदकों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों एवं दलीलों पर सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग की न्यायालय ने सुपुर्दनामा आवेदन खारिज कर दिया।
17 पन्नों के फैसले के बाद भी बरकरार है रकम का रहस्य
दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के मुताबिक, न्यायालय ने इस मामले में 17 पृष्ठों का निर्णय पारित किया है। उन्होंने बताया कि आवेदकों की ओर से रकम प्राप्त करने के लिए आवेदन लगाया गया था, लेकिन न्यायालय ने उनके दावों को स्वीकार नहीं किया और आवेदन निरस्त कर दिया।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि पिकअप के गुप्त बॉक्स में रखी करोड़ों रुपये की नकदी का वास्तविक स्रोत क्या था, उसका संबंध किस कारोबारी गतिविधि से है और उसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।
न्यायालय द्वारा सुपुर्दनामा आवेदन खारिज किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि रकम के अंतिम मालिकाना हक या किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता पर अंतिम निर्णय हो चुका है। इन पहलुओं का निर्धारण संबंधित जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
अब निगाहें आयकर विभाग की जांच पर टिकी हैं। जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन ही इस करोड़ों रुपये की नकदी के रहस्य से पर्दा उठाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।