बड़गांव में B.S. Sponge उद्योग के बाउंड्रीवाल निर्माण जारी रखने की ग्रामीणों ने रखी मांग

एसडीएम घरघोड़ा को सौंपे गए आवेदन में ग्रामीणों का दावा—रोजगार और क्षेत्रीय विकास की है उम्मीद
रायगढ़। जिले के तमनार तहसील अंतर्गत ग्राम बड़गांव में B.S. Sponge द्वारा कंपनी की भूमि पर बाउंड्रीवाल निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। ग्रामवासियों की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), घरघोड़ा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर प्रस्तावित उद्योग की स्थापना का समर्थन करने तथा कंपनी को अपनी भूमि पर नियमानुसार बाउंड्रीवाल निर्माण का कार्य पूरा करने देने की मांग की गई है।
आवेदन में ग्रामीणों ने कहा है कि गांव के नाम पर उद्योग का विरोध किए जाने की स्थिति में उनकी वास्तविक भावना और पक्ष को भी सामने रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि वे प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना को रोजगार और क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं।
160 एकड़ भूमि क्रय करने और सीमांकन का आवेदन में उल्लेख
ग्रामीणों की ओर से दिए जाने वाले आवेदन के अनुसार, B.S. Sponge ने ग्राम बड़गांव में उद्योग स्थापना के उद्देश्य से लगभग 160 एकड़ भूमि क्रय की है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में भूमि के सीमांकन की कार्यवाही की जा चुकी है, जिसमें संबंधित भूमिस्वामियों और आसपास की भूमि के स्वामियों की उपस्थिति रही।
ग्रामीणों का पक्ष है कि जब कंपनी ने उद्योग स्थापना के लिए भूमि खरीदी है और परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, तो नियमानुसार आवश्यक प्रक्रियाओं के तहत निर्माण कार्य को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। हालांकि, भूमि क्रय, सीमांकन और प्रस्तावित उद्योग से संबंधित सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि राजस्व अभिलेखों तथा संबंधित विभागों से किया जाना आवश्यक है।
ग्रामीणों के मुताबिक, उद्योग के आने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिल सकती है। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक विस्तार कंपनी की परियोजना संबंधी योजनाओं, प्रशासनिक स्वीकृतियों और भविष्य में किए जाने वाले कार्यों पर निर्भर करेगा।
बाउंड्रीवाल निर्माण में स्थानीय लोगों को रोजगार देने का दावा
आवेदन में कंपनी की ओर से अपनी भूमि की सुरक्षा के लिए शुरू किए गए बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य का भी उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य में स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जा रहा है, जिससे कुछ परिवारों को तत्काल आय का साधन मिला है।
उनका तर्क है कि यदि निर्माण कार्य में गांव के लोगों को ही काम करने का अवसर मिल रहा है, तो ऐसे कार्य को अनावश्यक रूप से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि भूमि की स्थिति, स्वामित्व और अन्य वैधानिक पहलुओं की जांच के बाद नियमानुसार निर्माण कार्य में उत्पन्न होने वाली बाधाओं का निराकरण किया जाए।
हालांकि, स्थानीय लोगों को रोजगार दिए जाने की बात आवेदन में ग्रामीणों की ओर से किया गया दावा है। इस संबंध में रोजगार पाने वाले श्रमिकों की स्थिति सामने आने पर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
गांव के नाम पर विरोध किए जाने पर जताई आपत्ति
ग्रामीणों ने आवेदन में कुछ व्यक्तियों पर व्यक्तिगत हितों के चलते बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य में बार-बार अवरोध उत्पन्न करने का आरोप लगाया है। आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि ग्रामीणों ने किसी व्यक्ति को गांव के सभी लोगों की ओर से कंपनी के कार्य का विरोध करने के लिए अधिकृत नहीं किया है। उन्होंने प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराते हुए मांग की है कि किसी भी विवाद की स्थिति में सभी संबंधित पक्षों को सुनकर तथ्यात्मक आधार पर निर्णय लिया जाए।
इस मामले में संबंधित व्यक्तियों का पक्ष उपलब्ध नहीं होने के कारण लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है। इसलिए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में देखने के बजाय संबंधित पक्षों के जवाब और प्रशासनिक जांच के आधार पर ही स्थिति का आकलन किया जाना उचित होगा।
प्रशासन से नियमानुसार कार्रवाई की अपेक्षा
ग्रामवासियों ने एसडीएम घरघोड़ा से आग्रह किया है कि कंपनी की भूमि पर बाउंड्रीवाल निर्माण के संबंध में प्रस्तुत आवेदन पर उचित कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों की मांग है कि भूमि संबंधी विवाद या निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा सामने आने पर राजस्व अभिलेखों, सीमांकन की स्थिति और संबंधित पक्षों के दस्तावेजों के आधार पर मामले का निराकरण किया जाए, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित हुए बिना आगे की कार्रवाई हो सके।
वैधानिक प्रक्रियाओं पर भी निगाह
किसी भी औद्योगिक परियोजना की स्थापना केवल भूमि क्रय और बाउंड्रीवाल निर्माण तक सीमित नहीं होती। इसके लिए लागू नियमों के अनुसार आवश्यक अनुमतियां, पर्यावरणीय स्वीकृतियां और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।
ऐसे में परियोजना का भविष्य कंपनी की तैयारियों, संबंधित विभागों की मंजूरियों, स्थानीय परिस्थितियों और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल, ग्रामीणों की ओर से आवेदन के माध्यम से अपना पक्ष रखने की पहल के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और निर्माण कार्य को लेकर सामने आ रही आपत्तियों का निराकरण किस प्रकार किया जाता है।
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