आवारा पशु हादसों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘जिम्मेदारी तय करें नगर निकाय’, 15 लाख मुआवजा देने का आदेश
Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
नई दिल्ली/संगरूर, 2026। सार्वजनिक स्थानों पर आवारा पशुओं से होने वाले हादसों को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकारों और नगर निकायों की जवाबदेही तय कर दी है। निशा बनाम नगर परिषद संगरूर एवं अन्य (2026 INSC 774) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न केवल पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
यह मामला सितंबर 2007 का है, जब पंजाब के संगरूर में एक सार्वजनिक सड़क पर आवारा बैल के हमले में विजय कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी निशा ने न्याय की लड़ाई शुरू की, जो लंबे समय तक विभिन्न स्तरों पर चली और अंततः सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंची।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी केवल ‘लापरवाही’ का मामला नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है। अदालत ने माना कि नगर निकायों और संबंधित प्राधिकरणों का यह दायित्व है कि वे ऐसे जोखिमों को नियंत्रित करें और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएं।
जवाबदेही तय करने वाले प्रमुख निर्देश
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों और नगर निकायों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश तय किए हैं—
मवेशियों की अनिवार्य टैगिंग (Tagging) ताकि उनकी पहचान और निगरानी संभव हो सके।
शहरों में आवारा पशुओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए ठोस और समयबद्ध योजना तैयार करना।
पर्याप्त संख्या में समर्पित आश्रय स्थल (गौशालाएं/शेल्टर) विकसित करना, ताकि पशुओं को सड़कों से हटाया जा सके।
मुआवजा तंत्र की स्थापना, जिससे हादसे के पीड़ितों या उनके परिजनों को त्वरित राहत मिल सके।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि नगर निकायों की निष्क्रियता के कारण यदि कोई व्यक्ति अपनी जान गंवाता है या घायल होता है, तो संबंधित निकाय को उसकी जिम्मेदारी उठानी होगी।
15 लाख का मुआवजा: न्याय के साथ संदेश
मामले के अंतिम निपटारे में अदालत ने पीड़िता निशा को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। यह केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही अब स्वीकार्य नहीं होगी।
देशभर के लिए नजीर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देशभर के नगर निकायों के लिए एक अहम नजीर साबित होगा। खासकर उन शहरों और कस्बों में, जहां आवारा पशुओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, वहां प्रशासन को अब अधिक जवाबदेह और सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
संकेत स्पष्ट: सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी प्रशासन की जिम्मेदारियों को नई परिभाषा देता है—जहां नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और लापरवाही की कीमत तय होगी।
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