“हे हनुमान, सड़क हादसों से बचाइए रायगढ़” — बच्चों के पोस्टर ने खींचा ध्यान, रामपुर पहाड़ पर गूंजी सामूहिक प्रार्थना

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़। जब समस्याओं के समाधान की उम्मीद प्रशासनिक स्तर पर धुंधली पड़ने लगे, तो समाज आस्था के सहारे रास्ता तलाशने लगता है। कुछ ऐसा ही दृश्य मंगलवार शाम शहर के रामपुर पहाड़ स्थित श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में देखने को मिला था, जहां सड़क हादसों, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिंतित नागरिकों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रार्थना की।
कार्यक्रम के दौरान एक अलग ही तस्वीर सामने आई—छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में पोस्टर थे, जिन पर अंग्रेज़ी और हिंदी के मिश्रण में लिखा था, “Shri Hanuman Ji, Please Road Accident se bachana Please (Raigarh)”। मासूम अपील से भरे इन पोस्टरों ने उपस्थित लोगों का ध्यान खींचा और यह संदेश दिया कि शहर की समस्याओं को लेकर नई पीढ़ी भी संवेदनशील है।
‘रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़’ अभियान से जुड़े विनय शुक्ला ने बताया कि शहर के सात प्रमुख मुद्दों—सड़क दुर्घटनाएं, बढ़ता प्रदूषण, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था, पेयजल की समस्या और जर्जर शैक्षणिक भवन—को लेकर यह चरणबद्ध प्रार्थना अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत हर मंगलवार अलग-अलग हनुमान मंदिरों में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्रार्थना की जाती है।
उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह से शुरू हुए इस अभियान में लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जो इस बात का संकेत है कि आमजन इन समस्याओं को लेकर भीतर ही भीतर कितने चिंतित हैं। मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में लगभग दो सौ से अधिक नागरिकों की उपस्थिति रही, जिनमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और शहर के प्रबुद्धजन शामिल थे।
कार्यक्रम में उत्कल समाज के पूर्व सचिव देवेश षड़ंगी, पं. हरिशंकर शर्मा, रामजी लाल अग्रवाल, नीलकंठ साहू, मयूर कछवाहा, राज देवांगन, जसविंदर कौर, रजनी बासोद, गजानंद पटेल, लक्ष्मी प्रसाद यादव, मनोज शुक्ला, निशित जायसवाल, प्रियंका सिदार, अम्बे सोना, विमला सिदार, उमा महंत, अनामिका चौहान, अनिल चीकू सहित अन्य नागरिक मौजूद रहे।
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि शहर की समस्याओं को लेकर सामूहिक चेतना का संकेत भी माना जा रहा है—जहां लोग एक ओर आस्था के जरिए समाधान की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं अप्रत्यक्ष रूप से व्यवस्था से जवाबदेही की मांग भी कर रहे हैं।
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