नवापाली हत्याकांड में अदालत का सख्त फैसला: जमीन विवाद में कुल्हाड़ी से हत्या करने वाले को उम्रकैद, पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति की अनुशंसा

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़, 23 जुलाई 2026।
करीब ढाई साल पहले हुए नवापाली हत्याकांड में आखिरकार न्याय की मुहर लग गई है। सुनियोजित और सशक्त पुलिस विवेचना तथा अभियोजन की प्रभावी पैरवी के आधार पर षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार चतुर्वेदी की अदालत ने आरोपी हरिलाल खड़िया (30) को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इसके साथ ही पीड़ित परिवार को राज्य की पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत ₹1 लाख की आर्थिक सहायता दिए जाने की अनुशंसा भी की है।
यह मामला थाना चक्रधरनगर क्षेत्र के ग्राम नवापाली का है, जहां 28 जनवरी 2024 को जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। जानकारी के अनुसार, मृतक विशाल सिंह ठाकुर मौके पर जमीन समतलीकरण और सफाई का कार्य करा रहे थे। इसी दौरान आरोपी हरिलाल खड़िया वहां पहुंचा और जमीन पाटने को लेकर विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी ने अपने पास रखी कुल्हाड़ी से मृतक के सिर और गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच के बाद हत्या का मामला दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू की। घटनास्थल से पुलिस ने खून से सने कपड़े, मिट्टी, मृतक की मोटरसाइकिल समेत कई महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य जुटाए। साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें आरोपी की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 29 जनवरी 2024 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार करते हुए हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी और खून से सने कपड़ों के बारे में जानकारी दी, जिसे पुलिस ने उसकी निशानदेही पर बरामद किया। बरामद साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट ने अभियोजन पक्ष को मजबूती प्रदान की।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक तन्मय बनर्जी ने ठोस और प्रभावी पैरवी की। वहीं विवेचना अधिकारी निरीक्षक प्रशांत राव आहेर द्वारा तैयार की गई वैज्ञानिक और तथ्यपरक जांच रिपोर्ट न्यायालय में निर्णायक साबित हुई। अदालत में 20 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए, जिनके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
इस फैसले को पुलिस और अभियोजन की संयुक्त कार्यप्रणाली की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि गंभीर अपराधों में सटीक जांच और मजबूत पैरवी से दोषियों को सजा दिलाना संभव है।
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