Latest News

मौत के नाम पर मुनाफा: बिलासपुर में ‘सर्पदंश मुआवजा’ के नाम पर संगठित ठगी का खुलासा, जांच की आंच प्रशासनिक गलियारों तक

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

बिलासपुर। सर्पदंश जैसी संवेदनशील और जानलेवा घटनाओं को मुनाफे के जरिये में बदल देने वाले एक संगठित रैकेट का खुलासा जिले में गहरी चिंता का विषय बन गया है। सरकारी आपदा राहत कोष से मिलने वाली सहायता राशि को फर्जी मामलों के जरिए निकालने के इस खेल में अब तक डॉक्टर, वकील, राजस्व कर्मचारी और पुलिस तंत्र से जुड़े लोग जांच के दायरे में आ चुके हैं। ताजा कार्रवाई में पुलिस ने सिम्स चौकी से जुड़े दो नगर सैनिकों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश तेज कर दी है।

पुलिस के अनुसार, यह पूरा तंत्र किसी एक व्यक्ति का काम नहीं बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क की तरह संचालित हो रहा था, जिसमें हर स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां तय थीं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अस्पताल से लेकर तहसील कार्यालय तक, कई कड़ियां इस रैकेट को मजबूती दे रही थीं।

मर्चुरी से शुरू होती थी साजिश की पटकथा

जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इस पूरे खेल की शुरुआत अस्पताल की मर्चुरी से होती थी। जैसे ही किसी शव को पोस्टमार्टम के लिए लाया जाता, गिरोह से जुड़े लोगों तक इसकी सूचना पहुंच जाती। इसके बाद नेटवर्क का दूसरा सदस्य मृतक के परिजनों तक पहुंचता और उन्हें शासन से मिलने वाली आर्थिक सहायता का लालच देकर मौत का कारण ‘सर्पदंश’ बताने के लिए तैयार करता।

पुलिस का दावा है कि कई मामलों में वास्तविक मौत का कारण कुछ और होने के बावजूद, फर्जी दस्तावेजों के सहारे सर्पदंश का केस तैयार किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मर्ग नंबर और अन्य दस्तावेजों में हेरफेर कर शासन के खाते से राहत राशि निकाल ली जाती थी।

नगर सैनिक बने ‘सूचना तंत्र’, गिरफ्तारी के बाद खुल सकते हैं बड़े राज

ताजा कार्रवाई में गिरफ्तार दोनों नगर सैनिकों पर आरोप है कि वे गिरोह के लिए ‘इनपुट चैनल’ का काम करते थे। पोस्टमार्टम के लिए आने वाले शवों की सूचना तत्काल गिरोह के सक्रिय सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी। इसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ मिलने की भी आशंका जताई जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान पूछताछ में यह साफ हो सकेगा कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे, कितने मामलों में फर्जीवाड़ा किया गया और कुल कितनी राशि का दुरुपयोग हुआ। जांच एजेंसियां अब इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि कहीं यह घोटाला बड़े स्तर पर तो नहीं फैला हुआ था।

पहले ही जेल जा चुके हैं कई ‘सफेदपोश’

इस मामले में यह पहली गिरफ्तारी नहीं है। इससे पहले डॉक्टर, अधिवक्ता, तहसील और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों सहित कई आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच में यह भी सामने आया था कि कुछ मामलों में मर्ग नंबर तक फर्जी थे और जिन लोगों के नाम पर सहायता राशि निकाली गई, उनके पते और पहचान संदिग्ध पाए गए।

यह तथ्य इस बात की ओर इशारा करता है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और सरकारी तंत्र की खामियों का फायदा उठाकर सुनियोजित तरीके से रकम निकाल रहा था।

जांच की आंच अब अफसरों तक

पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा अब उच्च स्तर तक पहुंच चुका है। एडीएम और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। यदि साक्ष्य पुख्ता मिले, तो आने वाले दिनों में और बड़ी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।

सवालों के घेरे में सिस्टम, भरोसे पर चोट

इस पूरे प्रकरण ने न केवल सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि किस तरह संवेदनशील मामलों में भी भ्रष्टाचार अपनी जड़ें जमा चुका है। सर्पदंश जैसे मामलों में जहां पीड़ित परिवारों को राहत और सहारा मिलना चाहिए, वहीं इसे कमाई का जरिया बना देना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

फिलहाल, पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है, जो न केवल इस रैकेट की गहराई बताएंगे बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों को भी उजागर करेंगे।

अन्य अधिक खबरों के लिए स्क्रॉल डाउन करें 👇⬇️

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button