Latest News

पुरुंगा–पेलमा परियोजनाओं को केंद्र की सैद्धांतिक मंजूरी, 56 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई तय

Journalist Amardeep Chauhan
amarkhabar.com

रायगढ़, 22 जुलाई।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक बार फिर औद्योगिक विस्तार और कोयला खनन के नाम पर बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र प्रभावित होने जा रहा है। केंद्र सरकार की वन सलाहकार समिति द्वारा पुरुंगा अंडरग्राउंड कोल ब्लॉक और पेलमा ओपन कास्ट परियोजना के लिए कुल 983.44 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को सैद्धांतिक (स्टेज-1) मंजूरी दिए जाने के बाद जिले के घने जंगलों पर संकट गहरा गया है। इस निर्णय से 56 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हो गया है।

यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब रायगढ़ पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों और खनन परियोजनाओं के दबाव को झेल रहा है। पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों के बीच इस फैसले को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

पुरुंगा अंडरग्राउंड ब्लॉक: संवेदनशील वन क्षेत्र में खनन की तैयारी
छाल तहसील स्थित पुरुंगा अंडरग्राउंड कोल ब्लॉक के लिए 621.331 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग परिवर्तन की अनुमति दी गई है। इस परियोजना का आवंटन अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड को किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, यहां 4,368 पेड़ों की कटाई होगी।

राज्य सरकार की रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि यह इलाका वन्यजीवों की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। एशियाई हाथी, स्लॉथ भालू, भारतीय पैंगोलिन, तेंदुआ और लोमड़ी जैसे जीवों की नियमित आवाजाही यहां दर्ज की गई है। ऐसे में खनन गतिविधियां इनके प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, संभावित प्रभाव को देखते हुए 14.81 करोड़ रुपये की वन्यजीव प्रबंधन योजना को भी स्वीकृति दी गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं व्यवहारिक स्तर पर सीमित प्रभाव ही छोड़ पाती हैं।

पेलमा ओपन कास्ट: बड़े पैमाने पर वन विनाश की आशंका
पेलमा ओपन कास्ट कोयला खदान परियोजना का दायरा इससे भी व्यापक है। कुल 2,077.935 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस परियोजना के अंतर्गत 362.109 हेक्टेयर घना वन क्षेत्र शामिल है। यहां 52,570 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, जो जिले के पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है।

वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि यह क्षेत्र हाथियों के नियमित आवागमन का मार्ग है। भले ही इसे आधिकारिक तौर पर एलीफेंट कॉरिडोर घोषित नहीं किया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नहीं है। ऐसे में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।

इस परियोजना का कोल ब्लॉक आवंटन साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) को मिला है, जबकि इसके संचालन का जिम्मा निजी क्षेत्र को सौंपा गया है।

स्टेज-1 मंजूरी: अभी बाकी हैं कई चरण
वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत वन भूमि के डायवर्जन की प्रक्रिया बहु-स्तरीय होती है। वर्तमान में मिली स्टेज-1 मंजूरी केवल सैद्धांतिक स्वीकृति है। इसके बाद निर्धारित शर्तों का पालन, क्षतिपूरक वनीकरण, और अन्य औपचारिकताओं के बाद स्टेज-2 की अंतिम स्वीकृति दी जाती है। अंतिम आदेश के बाद ही परियोजनाएं धरातल पर उतरती हैं।

हसदेव के बाद अब रायगढ़: बढ़ती चिंता
रायगढ़ में यह निर्णय ऐसे समय आया है जब हाल ही में हसदेव अरण्य क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर खनन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। वहां हजारों हेक्टेयर वन भूमि और लाखों पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। लगातार हो रहे इन फैसलों ने छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों और वहां निर्भर समुदायों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय असर: पर्यावरण से लेकर विस्थापन तक
विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा। वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के जीवन, आजीविका और सामाजिक संरचना पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है। साथ ही, जल स्रोतों, जैव विविधता और जलवायु संतुलन पर भी दीर्घकालिक प्रभाव की आशंका है।

ऐसे में रायगढ़ जिले में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का सवाल एक बार फिर प्रमुखता से सामने खड़ा हो गया है।

अन्य अधिक खबरों के लिए स्क्रॉल डाउन करें 👇⬇️

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button