अनुदानित बीज वितरण में लापरवाही: समय निकलने से पहले किसानों तक नहीं पहुंचा लाभ, जैविक खेती योजना पर सवाल

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
घरघोड़ा | 15 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ शासन की जैविक खेती को बढ़ावा देने की महत्वाकांक्षी योजना घरघोड़ा क्षेत्र में विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाने वाले ढेंचा और मूंग के बीज समय पर वितरित नहीं किए जा सके, जिससे बड़ी संख्या में किसान इस योजना के लाभ से वंचित रह गए।
जानकारी के अनुसार, कृषि विभाग को इन बीजों का आबंटन पहले ही प्राप्त हो चुका था, लेकिन वितरण में देरी और समुचित व्यवस्था के अभाव के चलते यह किसानों तक समय पर नहीं पहुंच पाए। परिणामस्वरूप, खरीफ सीजन के लिए इन फसलों की बुवाई का उपयुक्त समय निकल गया और पूरी योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ढेंचा और मूंग जैसी फसलें हरित खाद के रूप में बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। इन्हें मुख्य फसल की बुवाई से पहले बोकर बाद में मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है, नाइट्रोजन की मात्रा में सुधार होता है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। लेकिन समय पर बुवाई नहीं होने से इनका लाभ पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग द्वारा न तो समय रहते जानकारी दी गई और न ही बीज वितरण की कोई प्रभावी व्यवस्था की गई। जब तक किसानों को सूचना मिली, तब तक बुवाई का सही समय निकल चुका था। इससे शासन की मंशा और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर साफ नजर आता है।
किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यह स्पष्ट किया जाए कि बीज का आबंटन कब हुआ, वितरण में देरी क्यों हुई और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि यदि जवाबदेही तय नहीं की गई, तो भविष्य में भी ऐसी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि योजनाएं बनाने से अधिक महत्वपूर्ण उनका समयबद्ध और पारदर्शी क्रियान्वयन है। अन्यथा, किसानों के हित में बनी योजनाएं भी लापरवाही के कारण अपना उद्देश्य खो देती हैं।
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