महाजेनको ज़मीन फर्जीवाड़ा: सोती रही छत्तीसगढ़ सरकार, महाराष्ट्र ने शुरू की 110 करोड़ के घोटाले की जांच

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायपुर/मुंबई: छत्तीसगढ़ के गारे पेलमा कोल ब्लॉक से जुड़े 110 करोड़ रुपये के कथित भूमि अधिग्रहण फर्जीवाड़े में शासन-प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। जहां के निर्देश पर महाराष्ट्र सरकार ने तेजी दिखाते हुए जांच शुरू कर दी, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार पूरे मामले में निष्क्रिय नजर आ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस राज्य की जमीन पर यह करोड़ों का खेल हुआ, उसी राज्य की सरकार को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी, या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई।
कागजों पर बेच दी ज़मीन, छत्तीसगढ़ प्रशासन को खबर तक नहीं
पूरा मामला छत्तीसगढ़ के गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक से जुड़ा है। यहां बिचौलियों और दलालों ने महाराष्ट्र की बिजली कंपनी को करीब 110 करोड़ रुपये में ऐसी जमीन बेच दी, जिसका वास्तविक अस्तित्व ही संदिग्ध बताया जा रहा है। यह जमीन वनीकरण और विकास कार्यों के लिए खरीदी गई थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे लेन-देन में के पैसों के उपयोग पर भी छत्तीसगढ़ सरकार ने कोई निगरानी नहीं रखी।
छत्तीसगढ़ में कैसे खेला गया पूरा खेल
इस घोटाले में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं
बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दर पर जमीन खरीदी गई, जिससे सरकारी धन की खुली लूट हुई
जमीन के मूल्यांकन में जानबूझकर हेरफेर किया गया
पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और नियमों को नजरअंदाज किया गया
इन सबके बावजूद छत्तीसगढ़ का प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
PMO के निर्देश पर महाराष्ट्र सक्रिय, छत्तीसगढ़ अब भी खामोश
मामला जब तक पहुंचा, तब जाकर इसकी गंभीरता सामने आई। शिकायत में वित्तीय अनियमितताओं और दस्तावेजी गड़बड़ियों के ठोस प्रमाण दिए गए थे।
इसके बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए और महाजेनको से जुड़े पूरे प्रकरण की पड़ताल शुरू करवा दी।
इसके उलट, छत्तीसगढ़ सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है—क्या यह महज लापरवाही है या फिर अंदरखाने मिलीभगत?
जांच की आंच छत्तीसगढ़ तक पहुंचेगी
महाराष्ट्र में शुरू हुई जांच के तहत अब जमीन खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड और मूल्यांकन रिपोर्ट खंगाली जा रही हैं। यह तय माना जा रहा है कि जांच की आंच छत्तीसगढ़ के संबंधित विभागों और अधिकारियों तक भी पहुंचेगी।
इससे यह साफ हो सकता है कि किन अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत से यह 110 करोड़ का खेल खेला गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या बाहरी दबाव के बाद छत्तीसगढ़ सरकार जागेगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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