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प्रदूषण पर ‘डिजिटल शिकंजा’: लिमिट क्रॉस होते ही 30 हजार रोज़ का जुर्माना, फिर भी नहीं सुधर रहे उद्योग

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़ | 12 जुलाई 2026।
अब प्रदूषण फैलाकर बच निकलना आसान नहीं रहा। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने ईसी निगरानी पोर्टल के जरिए उद्योगों पर ऐसा डिजिटल शिकंजा कस दिया है, जिसमें जरा सी लापरवाही भी सीधे जेब पर भारी पड़ रही है। जैसे ही किसी प्लांट या कोल माइंस में प्रदूषण तय सीमा से ऊपर जाता है, पोर्टल तुरंत अलर्ट देता है—और उसी के साथ शुरू हो जाता है ₹30,000 प्रतिदिन का जुर्माना।

मशीनें पुरानी, बहाने नए… प्रदूषण जारी

हकीकत यह है कि चेतावनियों और सख्ती के बावजूद कई उद्योग अब भी सुधरने को तैयार नहीं हैं। आधुनिक तकनीक अपनाने के बजाय पुरानी और जर्जर मशीनों से काम चलाया जा रहा है, जिसका खामियाजा पूरे इलाके को जहरीली हवा और प्रदूषित वातावरण के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

हर सेकंड निगरानी: बचने का कोई रास्ता नहीं

पर्यावरण विभाग ने सभी बड़े उद्योगों के ईटीपी (Effluent Treatment Plant) और ईएसपी (Electrostatic Precipitator) को ऑनलाइन एनालाइजर से जोड़कर सीधे पोर्टल से लिंक कर दिया है।

– जैसे ही प्रदूषण की रीडिंग लिमिट पार करती है
– सिस्टम तुरंत अलर्ट जनरेट करता है
– और उसी वक्त से जुर्माने की गणना शुरू हो जाती है

कोल माइंस क्षेत्रों में भी वायु गुणवत्ता मापने के लिए ऑनलाइन सिस्टम सक्रिय है, जिससे धूल और धुएं के स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

दो महीने में 5.5 लाख वसूली, 11 कंपनियां दोषी

सिर्फ पिछले दो महीनों में ही करीब ₹5.40 लाख का जुर्माना वसूला जा चुका है। जांच में 11 कंपनियों को प्रदूषण फैलाने का दोषी पाया गया है—जिनमें बड़े प्लांट और कोल माइंस दोनों शामिल हैं।

इन कंपनियों पर गिरी गाज

पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने पर जिन उद्योगों पर कार्रवाई हुई, उनमें शामिल हैं:

– हिंडाल्को इंडस्ट्रीज
– मां मंगला इस्पात
– जेएसपीएल (गारे पेलमा 4/6)
– नवदुर्गा फ्यूल्स
– सारडा एनर्जी
– शिवशक्ति स्टील
– जेएसपीएल पतरापाली
– जेएसडब्ल्यू स्टील
– सुनील इस्पात

बिना ट्रीटमेंट धुआं = पूरे इलाके की सेहत खतरे में

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि बिना ट्रीटमेंट के निकलने वाला धुआं और गैसें पूरे क्षेत्र को जहरीला बना देती हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण बल्कि लोगों की सेहत पर भी गंभीर असर पड़ता है।

बड़ा सवाल: जुर्माना ही समाधान या सख्त कार्रवाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सिर्फ जुर्माना वसूलने से हालात सुधरेंगे? या फिर इन लापरवाह उद्योगों पर और कड़ी कार्रवाई की जरूरत है?

फिलहाल इतना तय है कि डिजिटल निगरानी शुरू हो चुकी है… अब बचना मुश्किल है, लेकिन सुधरना अभी बाकी है।

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Amar Chouhan

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