“मनरेगा कामों की पारदर्शिता पर सवाल: अमेरी पंचायत में आरटीआई से खुली फाइलों की परतें, अपील तक पहुंचा मामला”

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
सारंगढ़-बिलाईगढ़/बरमकेला।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी ने एक बार फिर ग्राम पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत अमेरी (जनपद पंचायत बरमकेला) से जुड़े एक मामले में आवेदक लक्ष्मण चौहान द्वारा मांगी गई जानकारी अब प्रथम अपील तक पहुंच गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में कहीं न कहीं व्यवधान या असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

दरअसल, आवेदक ने आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत मनरेगा के अंतर्गत कराए गए तालाब गहरीकरण कार्य से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी थी। इसमें स्वीकृति आदेश की प्रति, संपूर्ण मस्टररोल (हाजिरी रजिस्टर) तथा मजदूरों के भुगतान और उपस्थिति से संबंधित दस्तावेज शामिल थे। यह आवेदन मई 2026 में प्रस्तुत किया गया था, जिसके जवाब में ग्राम पंचायत स्तर से आंशिक जानकारी उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है।

ऑनलाइन हाजिरी और सीमित दस्तावेजों का हवाला
जनसूचना अधिकारी, ग्राम पंचायत अमेरी द्वारा दिए गए उत्तर में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में मजदूरों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की जाती है, इसलिए पारंपरिक हाजिरी रजिस्टर उपलब्ध नहीं है। साथ ही मस्टररोल के कुछ पृष्ठों (लगभग 1 से 43/45 तक) की प्रमाणित प्रतियां तैयार होने की जानकारी दी गई है। आवेदक को कार्यालयीन समय में उपस्थित होकर यह जानकारी निःशुल्क प्राप्त करने के लिए कहा गया है।
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि संबंधित कार्य की मूल फाइल जनपद पंचायत (मनरेगा शाखा) में सुरक्षित है, और स्वीकृति आदेश की प्रति के लिए वहां अलग से आवेदन करना होगा। यही बिंदु पूरे प्रकरण को जटिल बनाता है, क्योंकि एक ही कार्य से संबंधित जानकारी विभिन्न कार्यालयों में विभाजित रूप में उपलब्ध है।
प्रथम अपील में पहुंचा मामला
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, आवेदक ने सूचना अधूरी मिलने या प्रक्रिया से असंतुष्ट होकर प्रथम अपील दायर की है। प्रथम अपीलीय अधिकारी सह मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बरमकेला ने इस पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई की तिथि निर्धारित की है। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखें।
सूत्रों की मानें तो अपील में यह भी उल्लेख किया गया है कि मांगी गई जानकारी समय पर और पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई, जो कि आरटीआई अधिनियम की मंशा के विपरीत है। यदि सुनवाई के दौरान यह तथ्य प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पारदर्शिता बनाम प्रक्रिया—पुराना सवाल, नया संदर्भ
मनरेगा जैसे बड़े ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आरटीआई एक महत्वपूर्ण औजार माना जाता है। लेकिन जमीनी स्तर पर अक्सर देखा गया है कि जानकारी अलग-अलग कार्यालयों में बंटी होती है या तकनीकी कारणों का हवाला देकर पूर्ण सूचना देने से बचा जाता है। इस मामले में भी ऑनलाइन उपस्थिति और फाइलों के अलग-अलग स्थान पर होने का तर्क सामने आया है।
प्रशासन की अगली परीक्षा
अब नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि आवेदक को मांगी गई पूरी जानकारी मिलती है या नहीं, और यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी। यह मामला न सिर्फ एक पंचायत तक सीमित है, बल्कि यह पूरे तंत्र के लिए एक संकेत है कि पारदर्शिता के दावों को जमीन पर किस तरह परखा जा रहा है।
(नोट: यह खबर उपलब्ध दस्तावेजों और आधिकारिक पत्राचार के आधार पर तैयार की गई है। अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागीय जांच और सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।)
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