“शराब पार्टी से शुरू हुआ विवाद, किशोर की मौत पर खत्म: खरसिया के गुरदा कांड का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्त में”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 28 मई।
खरसिया थाना क्षेत्र के ग्राम गुरदा में मिले 16 वर्षीय किशोर के शव की गुत्थी को पुलिस ने सुलझाते हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया है। शुरुआती तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिले इस शव के पीछे की कहानी अब सामने आई है—जहां शराब पार्टी के दौरान मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और एक किशोर की जान चली गई।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में चन्द्रशेखर उर्फ चंदा डनसेना (22), रघुसिंह उर्फ रघुनाथ राठिया (30) और एक विधि से संघर्षरत बालक को गिरफ्तार किया गया है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
घटना की शुरुआत 24 मई की सुबह से होती है, जब ग्राम बरभौना का रहने वाला किशोर अपने परिचित ऋषि डनसेना के साथ पल्सर मोटरसाइकिल पर काम के बहाने निकला था। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों की चिंता बढ़ी और अगले दिन 25 मई की सुबह ग्राम गुरदा के डोगरमुड़ा खार क्षेत्र में एक बरगद पेड़ के नीचे उसका शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई।
मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम ने जब शव का निरीक्षण किया, तो शरीर पर गंभीर चोटों के निशान साफ दिखाई दिए। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत को हत्यात्मक पाया गया, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी।
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक को आखिरी बार साथ ले जाने वाले ऋषि डनसेना से पूछताछ की। उसने बताया कि वह किशोर को अपने साथियों के पास छोड़कर चला गया था और बाद में फोन करने पर उसे झगड़े और मारपीट की आवाज सुनाई दी थी। यही जानकारी पुलिस के लिए अहम कड़ी साबित हुई।
इसके बाद संदेह के आधार पर चन्द्रशेखर, रघुनाथ और एक नाबालिग को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने पूरी घटना कबूल कर ली। आरोपियों ने बताया कि चारों युवक खेत में बैठकर शराब पी रहे थे। इसी दौरान ‘चखना’ के लिए आम तोड़ने को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया।
आरोप है कि तीनों ने मिलकर किशोर के साथ बेरहमी से हाथ-मुक्कों से मारपीट की। मारपीट के दौरान किशोर खेत की मेड़ से फिसलकर तालाब की ओर गिर पड़ा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को उठाकर पास के बरगद पेड़ के नीचे रख दिया, ताकि मामला दुर्घटना जैसा लगे। बाद में पूछताछ होने पर उन्होंने झूठी कहानी गढ़ते हुए कहा कि किशोर खाना खाकर घर चला गया है।
पुलिस ने घटनास्थल पर आरोपियों से घटना का पुनर्निर्माण कराया और उनके मेमोरेंडम के आधार पर कपड़े सहित अन्य साक्ष्य जब्त किए। मामले में हत्या और साक्ष्य छिपाने से संबंधित धाराओं को जोड़ा गया है।
इस पूरे मामले का खुलासा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में किया गया। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि जिले में गंभीर अपराधों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई गई है और अपराध कर बच निकलना अब आसान नहीं होगा।
गुरदा की यह घटना न सिर्फ एक जघन्य अपराध की कहानी है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे नशे की स्थिति में मामूली विवाद भी घातक रूप ले सकता है। फिलहाल पुलिस की त्वरित कार्रवाई से मामले का खुलासा जरूर हो गया है, लेकिन इस घटना ने ग्रामीण समाज में कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
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