“लारा NTPC के साए में सवाल: बिजली नहीं, धूल और बेरोजगारी क्यों मिल रही है स्थानीयों को?” – पद्मनाभ प्रधान

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़/पुसौर।
उद्योग और विकास के बड़े दावों के बीच लारा स्थित NTPC परियोजना एक बार फिर स्थानीय असंतोष के केंद्र में आ गई है। पुसौर ब्लॉक सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से पावर प्लांट के संचालन के बावजूद उन्हें न तो बिजली का प्रत्यक्ष लाभ मिला है और न ही रोजगार के पर्याप्त अवसर।
ग्रामीणों का कहना है कि “जब हमारे ही इलाके में बिजली बन रही है, तो आखिर हमें उसका फायदा क्यों नहीं मिल रहा?” यह सवाल अब जनसुनवाई से पहले तेज़ी से उठने लगा है।
जमीन गई, रोजगार नहीं मिला
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विकास और रोजगार के नाम पर कंपनियों ने उनकी जमीन तो अधिग्रहित कर ली, लेकिन बदले में स्थायी रोजगार देने के वादे पूरे नहीं किए। कई ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें उचित जानकारी के अभाव में जमीन देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि नौकरी देने के नाम पर पैसे की मांग की जाती है, जिससे गरीब और ग्रामीण वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
फ्लाई ऐश से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या
क्षेत्र में फ्लाई ऐश (राख) का मुद्दा भी लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, राख के उड़ते गुबार से सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। गर्मी के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है, जब धूल और प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कंपनी द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
जनसुनवाई पर उठे सवाल
NTPC के प्रस्तावित विस्तार को लेकर होने वाली पर्यावरण जनसुनवाई का ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब पहले से मौजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो नई परियोजना या विस्तार की अनुमति देना उचित नहीं होगा।
सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्यकर्ता पद्मनाभ प्रधान का कहना है,
“कंपनियां खुलती हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलता। अगर मिलता भी है तो पैसे की मांग की जाती है। यह बातें लगातार ग्रामीणों से सुनने में आ रही हैं।”
पुसौर ब्लॉक के विकास पर भी सवाल
स्थानीय नागरिक यह भी पूछ रहे हैं कि इतने बड़े उद्योगों की मौजूदगी के बावजूद पुसौर ब्लॉक में वास्तविक विकास कितना हुआ है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
मुख्य मांगें क्या हैं?
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि—
जनसुनवाई से पहले स्थानीय लोगों को दिए गए रोजगार का पारदर्शी आंकड़ा प्रस्तुत किया जाए
बिना किसी रिश्वत के नौकरी देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
फ्लाई ऐश और प्रदूषण पर ठोस नियंत्रण के उपाय किए जाएं
पहले से प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाए
लारा NTPC परियोजना जहां एक ओर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर उठ रहे ये सवाल विकास मॉडल की जमीनी हकीकत को उजागर करते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और कंपनी इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और जनसुनवाई के दौरान स्थानीयों की आवाज़ को कितना महत्व दिया जाता है।
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