“छुट्टी अब ‘हक’ नहीं, ‘अनुमति’ से मिलेगी: शासन का सख्त संदेश, लापरवाही पर ब्रेक इन सर्विस की चेतावनी”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायपुर। सरकारी दफ्तरों में अक्सर सुनी जाने वाली पंक्ति—“सर, अचानक जरूरी काम आ गया था”—अब शायद इतिहास बनने जा रही है। छत्तीसगढ़ शासन ने कर्मचारियों की छुट्टियों को लेकर ऐसा स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है, जिसने “मन किया और निकल लिए” वाली कार्यसंस्कृति पर सीधा प्रहार किया है।
सामान्य प्रशासन विभाग के ताजा निर्देशों में साफ कर दिया गया है कि अब बिना पूर्व अनुमति छुट्टी पर जाना न केवल अनुशासनहीनता माना जाएगा, बल्कि इसके गंभीर परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। यानी अब पहले आवेदन, फिर अधिकारी की स्वीकृति, और उसके बाद ही घर-गांव, शादी-ब्याह या घूमने का कार्यक्रम तय होगा। अन्यथा, अनुपस्थित कर्मचारी के नाम के आगे फाइलों में “अनधिकृत अनुपस्थिति” दर्ज होने में देर नहीं लगेगी।
दरअसल, आने वाले समय में “सुशासन तिहार” और जनगणना जैसे बड़े प्रशासनिक कार्य प्रस्तावित हैं। ऐसे में शासन किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कदम केवल अनुशासन कायम करने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी कार्यों की गति और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
दिलचस्प यह है कि सरकार ने आधुनिक संचार माध्यमों का भी हवाला दिया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी कर्मचारी को आकस्मिक अवकाश लेना पड़े, तो वह कम से कम फोन, व्हाट्सएप या अन्य डिजिटल माध्यम से सूचना जरूर दे। यानी अब “नेटवर्क नहीं था” या “फोन साइलेंट था” जैसे बहाने भी ज्यादा असरदार नहीं रहेंगे।
लंबी छुट्टियों पर जाने वालों के लिए भी जिम्मेदारी तय कर दी गई है। अब कोई भी कर्मचारी अपना कार्य अधूरा छोड़कर नहीं जा सकेगा। उसे अपने कार्यभार को किसी अन्य कर्मचारी को सौंपना होगा, ताकि दफ्तर की कार्यप्रणाली प्रभावित न हो। इससे वर्षों से चली आ रही “फाइल किसके पास है, किसी को पता नहीं” वाली संस्कृति पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है।
सबसे अहम बात यह है कि शासन ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति छुट्टी लेने वाले कर्मचारियों पर “ब्रेक इन सर्विस” जैसी कड़ी कार्रवाई हो सकती है। इसका सीधा असर उनकी नौकरी और सेवा रिकॉर्ड पर पड़ेगा।
सरकारी हलकों में इस आदेश को एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह केवल छुट्टियों पर नियंत्रण नहीं, बल्कि कार्यसंस्कृति में सुधार की दिशा में उठाया गया ठोस कदम माना जा रहा है।
अब सरकारी कर्मचारियों के सामने साफ विकल्प है—पहले अनुमति या फिर जोखिम। छुट्टी मनाने से पहले यह तय करना होगा कि सुकून की कुछ दिन की छुट्टी ज्यादा जरूरी है या वर्षों की नौकरी।
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