“मैट्रिमोनियल के नाम पर ‘डिजिटल जाल’: रायगढ़ में साइबर ठगी के संगठित गिरोह का पर्दाफाश”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 13 अप्रैल 2026।
शहर में ऑनलाइन रिश्तों के नाम पर बिछाए जा रहे ठगी के जाल का आखिरकार पर्दाफाश हो ही गया। रायगढ़ पुलिस ने एक ऐसे संगठित साइबर गिरोह का खुलासा किया है, जो फर्जी मैट्रिमोनियल साइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को अपने झांसे में लेकर उनसे पैसे ऐंठ रहा था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन लोक सेवा केंद्र की आड़ में किया जा रहा था, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दरोगापारा स्थित एक कथित सेवा केंद्र पर दबिश दी। यहां से जो खुलासे हुए, उन्होंने साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों की एक खतरनाक तस्वीर सामने रख दी।
जांच में सामने आया कि इस रैकेट का संचालन कपिल गर्ग नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था, जो पहले लोक सेवा केंद्र के जरिए वैध कार्य करता था। लेकिन आईडी निरस्त होने के बाद उसने अपने कार्यालय को साइबर ठगी के अड्डे में तब्दील कर दिया। “इंडिया मैट्रिमोनी” जैसे नामों का सहारा लेकर लोगों को भरोसे में लिया जाता था और उन्हें विवाह प्रस्तावों का झांसा दिया जाता था।
इस पूरे खेल में दर्जनों युवतियों की भूमिका भी सामने आई है। ये युवतियां फर्जी जीमेल आईडी और मोबाइल नंबरों के जरिए यूट्यूब चैनल संचालित करती थीं। इन चैनलों पर आकर्षक प्रोफाइल, वीडियो और फोटो अपलोड किए जाते थे, जिनमें संपर्क नंबर साझा कर संभावित शिकार को फंसाया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति संपर्क करता, उससे पहले बायोडाटा लिया जाता और फिर रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर यूपीआई के जरिए रकम वसूली जाती।

इतना ही नहीं, बातचीत आगे बढ़ाने और कथित ‘मीटिंग’ कराने के नाम पर भी अतिरिक्त रकम ली जाती थी। व्हाट्सएप पर क्यूआर कोड भेजकर बार-बार भुगतान कराया जाता और अंत में यह कहकर संपर्क तोड़ दिया जाता कि संबंधित युवती को रिश्ता पसंद नहीं आया। इसके बाद गिरोह अगले शिकार की तलाश में जुट जाता।
पुलिस की जांच यहीं नहीं रुकी। कपिल गर्ग से मिली जानकारी के आधार पर एक अन्य केंद्र पर भी दबिश दी गई, जहां से यह खुलासा हुआ कि पिछले तीन वर्षों से इस नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा था। यहां भी युवतियों के माध्यम से लोगों को इसी तरह जाल में फंसाया जा रहा था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज, फोटोशॉप सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ के प्रमाण और विभिन्न शासकीय विभागों की सील-मुहर जब्त की हैं। यह संकेत देते हैं कि गिरोह न केवल ठगी कर रहा था, बल्कि दस्तावेजों में हेरफेर कर अपनी गतिविधियों को वैध दिखाने की भी कोशिश कर रहा था।
इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान मैट्रिमोनियल साइट या सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
रायगढ़ का यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति एक चेतावनी है—जहां भरोसे का हर डिजिटल चेहरा असली हो, यह जरूरी नहीं।
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