डोंगामौहा जेपीएल गेट पर कुचला गया युवा चालक: एंट्री कराने के बाद लौटते वक्त तेज रफ्तार ट्रेलर ने ली जान
Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़/तमनार। औद्योगिक क्षेत्र तमनार में एक बार फिर लापरवाह ड्राइविंग ने एक युवा की जिंदगी छीन ली। डोगामौहा स्थित जेपीएल कंपनी के मुख्य द्वार के पास गुरुवार सुबह हुए दर्दनाक हादसे में 22 वर्षीय ट्रेलर चालक ओमप्रकाश मेहता की मौके पर ही मौत हो गई। घटना ने न सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही की हकीकत भी उजागर कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, मृतक ओमप्रकाश मेहता, निवासी झारखंड, ट्रेलर क्रमांक CG 13 L 3591 का चालक था और रोजाना की तरह सुबह डोगामौहा स्थित जेपीएल प्लांट से रायगढ़ की ओर जाने की तैयारी में था। बताया जा रहा है कि उसने अपनी गाड़ी मेन गेट के पास साइड में खड़ी की और आवश्यक गेट पास एंट्री कराने के बाद वापस अपने वाहन की ओर लौट रहा था।
इसी दौरान पीछे की ओर से आ रहे ट्रेलर क्रमांक CG 13 L 0379 के चालक ने तेज रफ्तार और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ओमप्रकाश मेहता सड़क पर उछलकर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। साथी चालकों और कर्मचारियों ने तत्काल घायल को उठाकर तमनार अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां मौजूद डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद ही उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार, मृतक के सीने, सिर, माथे और कान समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं, जो जानलेवा साबित हुईं।
घटना की सूचना मिलते ही तमनार पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। मृतक के भाई की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी ट्रेलर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच की जा रही है।
यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण की पोल खोलता नजर आता है। प्लांट गेट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जहां हर समय भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है, वहां गति नियंत्रण और सतर्कता के सख्त नियमों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। बावजूद इसके, लापरवाही का यह सिलसिला थमता नहीं दिख रहा।
ओमप्रकाश मेहता की मौत ने एक बार फिर उस सवाल को जिंदा कर दिया है—क्या औद्योगिक विकास की रफ्तार के बीच श्रमिकों और चालकों की सुरक्षा महज औपचारिकता बनकर रह गई है? फिलहाल, एक परिवार ने अपना जवान बेटा खो दिया है और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब देखना यह है कि यह कार्रवाई कितनी दूर तक जाती है और क्या इससे भविष्य में ऐसे हादसों पर लगाम लग पाएगी।
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