तमनार नगर पंचायत पर अंतरिम रोक बरकरार: हाईकोर्ट ने 16 फरवरी की अधिसूचना के अमल पर लगाई ब्रेक, अगली सुनवाई तक ग्राम पंचायत को काम जारी रखने की अनुमति

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
बिलासपुर/रायगढ़, 25 फरवरी 2026। तमनार नगर पंचायत के गठन को लेकर जारी विवाद पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायालय ने 16 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के प्रभाव और उसके आधार पर गठित समिति के संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही याचिकाकर्ता ग्राम पंचायत को अपने कार्य पूर्ववत जारी रखने की अनुमति भी प्रदान की है।
मामला उच्च न्यायालय की डब्ल्यूपीसी क्रमांक 855/2026 में ग्राम पंचायत तमनार बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के रूप में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि तमनार ब्लॉक को पूर्व में अधिसूचित क्षेत्र घोषित किए जाने के बावजूद, विवादित अधिसूचना के माध्यम से ग्राम पंचायत तमनार एवं ग्राम पंचायत बासनपाली का विलय कर नगर पंचायत तमनार का गठन किया गया। इसके बाद नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 16(1) के तहत एक समिति का गठन भी कर दिया गया, जो विधि विरुद्ध है।

याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि 16-02-2026 की अधिसूचना संक्रमणकालीन अवधि के प्रावधानों के विपरीत है, क्योंकि नवगठित नगर पंचायत के विधिवत गठन तक संबंधित क्षेत्र में ग्राम पंचायत का अधिकार क्षेत्र बना रहना चाहिए था। इसलिए अंतरिम संरक्षण प्रदान किए जाने की मांग की गई।
राज्य की ओर से उपस्थित उप सरकारी अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की और यह दलील दी कि अधिसूचना ग्राम पंचायत बासनपाली द्वारा 27-02-2024 को पारित प्रस्ताव के आलोक में जारी की गई है, अतः अंतरिम राहत नहीं दी जानी चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में अंतरिम संरक्षण दिया जाना उचित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 16 फरवरी 2026 की अधिसूचना का प्रभाव और उसके तहत गठित समिति का संचालन अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगा। साथ ही याचिकाकर्ता ग्राम पंचायत को अपने कार्यों का संचालन जारी रखने की अनुमति दी गई है।
न्यायालय ने राज्य पक्ष को जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय प्रदान किया है और प्रकरण को अगली तिथि पर सुनवाई हेतु सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
इस आदेश के बाद तमनार क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था फिलहाल पूर्व स्थिति में बनी रहेगी। नगर पंचायत गठन को लेकर चल रही कानूनी जंग अब अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां राज्य सरकार को अपना विस्तृत पक्ष रखना होगा।