बतौली की बेटी लीजा पाल चौहान बनीं व्यवहार न्यायाधीश — परिश्रम, अनुशासन और सपनों की शानदार जीत

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
सीतापुर बतौली।
छोटे नगरों से निकलकर बड़े मुकाम हासिल करने वाली कहानियाँ अक्सर प्रेरणा बनती हैं। नगर बतौली की होनहार बेटी लीजा पाल ने ऐसी ही एक मिसाल पेश की है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) परीक्षा-2024 में सफलता प्राप्त कर उन्होंने न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। परिणाम सामने आते ही बतौली नगर सहित पूरे जिले में गर्व और खुशी का माहौल बन गया।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, नवा रायपुर द्वारा विज्ञापन क्रमांक 04/2024 के तहत विधि एवं विधायी कार्य विभाग में व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) के 57 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। इस प्रतिस्पर्धी परीक्षा की मुख्य परीक्षा 21 दिसंबर 2025 को संपन्न हुई, जिसका परिणाम 22 जनवरी 2026 को घोषित किया गया। चयन प्रक्रिया के अगले चरण में 183 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया, जो 10 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक चला। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार अंतिम चयन सूची में लीजा चौहान का नाम शामिल होना बतौली के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
लीजा ऐसे परिवार से आती हैं जहाँ शिक्षा और सामाजिक सरोकारों की मजबूत परंपरा रही है। वे बतौली की पूर्व जनपद उपाध्यक्ष श्रीमती राजकुमारी पाल चौहान और स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत महेंद्र पाल की सुपुत्री हैं तथा स्वर्गीय हवलराम पाल की नातिन हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी विधि और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं — उनकी बहन अधिवक्ता मंजुल पाल छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में कार्यरत हैं, जबकि डॉ. मयंक पाल चिकित्सा क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। परिवार का यह शैक्षणिक वातावरण लीजा के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत बना।
करीबी लोगों के अनुसार लीजा की सफलता अचानक नहीं, बल्कि वर्षों की सतत तैयारी, अनुशासित दिनचर्या और स्पष्ट लक्ष्य का परिणाम है। उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच अध्ययन को प्राथमिकता दी और प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिन राह पर लगातार धैर्य बनाए रखा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लीजा की उपलब्धि बतौली जैसे कस्बाई क्षेत्र के युवाओं के लिए संदेश है कि मजबूत इरादा और मेहनत हो तो बड़े सपने भी साकार हो सकते हैं। शिक्षकों और समाज के वरिष्ठजनों ने इसे क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरक उपलब्धि बताया है।
अब जब लीजा पाल न्यायिक सेवा में प्रवेश करने जा रही हैं, उनसे न्याय व्यवस्था में संवेदनशीलता, निष्पक्षता और सामाजिक सरोकारों को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बतौली की गलियों में इन दिनों एक ही चर्चा है — “हमारी बेटी न्यायाधीश बन गई।” यह उपलब्धि केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक खुशी और उम्मीदों की कहानी बन चुकी है।
न्यूज़ सोर्स..


News associate Rajkumari pal chauhan