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ऋण पर टालमटोल अब नहीं चलेगी: बैंकों को दो-टूक चेतावनी, लक्ष्य चूके तो होगी जवाबदेही

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़, 5 फरवरी 2026।
जिले में वर्षों से चल रही ऋण वितरण की सुस्ती और फाइलों की अनावश्यक घुमंतू प्रक्रिया पर आखिरकार प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला मनोवैज्ञानिक परामर्शदात्री समिति एवं पुनरीक्षण समिति की बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन वाराणे ने बैंकों को साफ शब्दों में चेताया कि योग्य हितग्राहियों को ऋण देने में देरी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में जब विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण प्रकरणों की स्थिति सामने आई, तो यह स्पष्ट हो गया कि कई मामलों में न तो पात्रता का अभाव है और न ही बजट की कमी—रुकावट केवल बैंकिंग स्तर की ढिलाई और अनिर्णय है। सीईओ ने कहा कि ऋण को ‘जोखिम’ बताकर टालना या फाइलों को महीनों दबाकर रखना सीधे तौर पर शासन की योजनाओं की मंशा के खिलाफ है।

महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए निर्धारित साख-जमा अनुपात पर विशेष चर्चा करते हुए सीईओ ने सवाल उठाया कि जब योजनाएं मौजूद हैं और हितग्राही तैयार हैं, तो ज़मीनी स्तर पर परिणाम क्यों नहीं दिख रहा? उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों की समीक्षा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी।

कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, स्व-रोज़गार, मुद्रा योजना, स्व-सहायता समूह बैंक लिंकेज, किसान क्रेडिट कार्ड, अंत्योदय और जनजातीय उद्यमिता जैसे मामलों में लंबित फाइलों को शीघ्र निपटाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। सीईओ ने दो-टूक कहा कि ऋण वितरण केवल लक्ष्य पूरा करने की खानापूर्ति नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी आजीविका को मज़बूत करने का औज़ार है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि जैसी योजनाओं की धीमी प्रगति पर भी नाराज़गी जताई गई। सीईओ ने स्पष्ट किया कि वार्षिक साख योजना के लक्ष्य किसी औपचारिक रिपोर्ट के लिए नहीं, बल्कि ज़मीनी असर के लिए होते हैं—और उन्हें हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए।

बैठक में यह भी बताया गया कि 9 से 13 फरवरी तक “सुरक्षित बैंकिंग की ओर” विषय पर वित्तीय जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। हालांकि, प्रशासनिक हलकों में यह सवाल भी उठा कि जब तक बैंक खुद सक्रिय नहीं होंगे, तब तक केवल जागरूकता से स्थिति नहीं सुधरेगी।

बैठक में लीड बैंक मैनेजर, रिज़र्व बैंक प्रतिनिधि और विभिन्न बैंकों के अधिकारी मौजूद रहे। संकेत साफ़ हैं—अब समीक्षा केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी। यदि लक्ष्य पूरे नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में जिम्मेदारी तय होना तय माना जा रहा है।

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Amar Chouhan

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