जामताड़ा से आगे निकलता देवघर! बाबा नगरी पर साइबर ठगी का साया, AI से लैस नया अपराध तंत्र

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
कभी आस्था, शांति और विश्वास की पहचान रही देवघर की बाबा नगरी आज एक ऐसे कारण से चर्चा में है, जो चिंता पैदा करता है। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल यह पवित्र धाम अब धीरे-धीरे साइबर अपराध के नए हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहा है।
जो बदनामी अब तक जामताड़ा के नाम थी, वह अब देवघर की ओर खिसकती दिखाई दे रही है — और फर्क इतना है कि यहाँ ठगी अब ज्यादा शातिर, तकनीकी और खतरनाक हो चुकी है।
आस्था के शहर में हाई-टेक अपराध
स्थानीय खुफिया इनपुट और 2026 की शुरुआत में सामने आए रुझानों के मुताबिक, देवघर और आसपास के इलाकों में सक्रिय साइबर गिरोहों ने अब Artificial Intelligence (AI) और Modern Software Engineering को अपना हथियार बना लिया है। यह अपराध अब केवल फोन कॉल या OTP तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे मानसिक दबाव, तकनीकी जाल और डिजिटल पहचान की चोरी पर आधारित हो गया है।
1. “डिजिटल अरेस्ट” – डर से वसूली का नया हथकंडा
2025-26 का सबसे खतरनाक और तेजी से फैलता साइबर फ्रॉड है Digital Arrest Scam।
अब ठग खुद को CBI, ED या पुलिस अधिकारी बताकर सिर्फ कॉल नहीं करते, बल्कि WhatsApp या Skype पर वीडियो कॉल करते हैं।
पीछे वर्चुअल बैकग्राउंड में पुलिस स्टेशन या सरकारी दफ्तर दिखता है। शिकार को बताया जाता है कि उसके नाम से कोई पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट या हवाला पैसा है।
इसके बाद व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” यानी घर में ही नजरबंद रहने का डर दिखाकर मामला रफा-दफा करने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।
2. AI वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक का खौफनाक खेल
देवघर में सक्रिय 20-25 साल के कई युवा अब AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वॉयस क्लोनिंग: सोशल मीडिया से किसी करीबी की आवाज़ निकालकर हूबहू वैसी ही आवाज़ तैयार की जाती है। फिर कॉल आता है—
“मेरा एक्सीडेंट हो गया है… तुरंत पैसे भेजो।”
Deepfake वीडियो कॉल: वीडियो कॉल के दौरान बड़े पुलिस अधिकारी या बैंक मैनेजर का चेहरा लगाया जाता है, जिससे शक की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
यह ठगी भावनात्मक दबाव और तकनीक का सबसे खतरनाक मिश्रण है।
3. APK फाइल और मोबाइल पर पूरा कब्जा
OTP फ्रॉड अब पुरानी बात हो चुकी है। नया हथियार है APK Malware।
PM-Kisan, KYC Update या किसी सरकारी योजना के नाम पर एक लिंक भेजा जाता है।
जैसे ही यूजर APK फाइल इंस्टॉल करता है, ठगों को मोबाइल का पूरा एक्सेस मिल जाता है — SMS, गैलरी, कॉन्टैक्ट्स और बैंक ऐप तक।
इसके बाद बिना OTP पूछे खाते से पैसा साफ कर दिया जाता है।
4. टास्क और निवेश फ्रॉड: भरोसे से धोखा
“YouTube वीडियो लाइक करें”, “वर्क फ्रॉम होम”, “डेली कमाई” जैसे विज्ञापनों के जरिए शिकार फंसाया जाता है।
शुरुआत में 200-500 रुपये देकर भरोसा जीता जाता है।
फिर VIP टास्क, क्रिप्टो निवेश या इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म के नाम पर लाखों रुपये जमा करवाकर गिरोह गायब हो जाता है।
देवघर से ऑपरेट हो रहे कई नेटवर्क अब विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज का सहारा ले रहे हैं।
5. म्यूल अकाउंट: ठगी की रीढ़
RBI द्वारा देवघर को रेड लिस्ट में डाले जाने की बड़ी वजह है Mule Accounts।
गरीब ग्रामीणों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं।
ठगी का पैसा इन खातों में आता है और मिनटों में ATM या UPI के ज़रिये निकाल लिया जाता है।
असल अपराधी पर्दे के पीछे सुरक्षित रहता है।
सरकार और एजेंसियों का पलटवार
साइबर अपराध से निपटने के लिए अब सरकार और RBI ने मोर्चा संभाल लिया है।
Pratibimb Portal और I4C के जरिए रियल-टाइम ट्रैकिंग
ठगी में इस्तेमाल सिम के एक्टिव होते ही अलर्ट
हर बड़े बैंक में साइबर पुलिस से जुड़ा Nodal Officer, जो सूचना मिलते ही 10 मिनट में खाते फ्रीज कर सकता है
सावधान रहें, सतर्क रहें
अगर आपके या आपके किसी परिचित के साथ ऐसा कुछ हो: 📞 तुरंत 1930 पर कॉल करें
🌐 http://www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
देवघर केवल बाबा बैद्यनाथ की नगरी ही रहे —
यह सुनिश्चित करना अब प्रशासन, समाज और हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
क्योंकि साइबर अपराध में एक पल की चूक, जिंदगी भर का नुकसान बन सकती है।