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ओडिशा सीमा पर प्रशासन की लोहे की दीवार: दूसरे दिन भी धान तस्करी पर कसा शिकंजा, सभी जंगल मार्ग पूरी तरह सील

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़। जिले में धान तस्करी पर नकेल कसने प्रशासन ने दूसरे दिन भी अभूतपूर्व कार्रवाई की है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर अंतर्राज्यीय सीमाओं पर 24×7 निगरानी, कड़े बैरियर, जंगल रास्तों की नाकेबंदी और संदिग्ध वाहनों की सघन जांच ने तस्करी के नेटवर्क को लगभग पंगु कर दिया है। ओडिशा सीमा से लगे किलकिला, हाडीपानी और कोडामाई क्षेत्र के सभी कच्चे, पगडंडी और जंगल मार्गों को जेसीबी से गहरे गड्ढे खोदकर पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है।




जंगल रास्तों पर प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ रणनीति

ओडिशा सीमा से धान की अवैध आवाजाही की लगातार सूचना मिलने के बाद राजस्व, खाद्य व पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों ने बड़ी कार्रवाई अंजाम दी। बिचौलियों द्वारा रात के अंधेरे में उपयोग किए जा रहे सभी वैकल्पिक मार्गों को चिन्हांकित कर सील कर दिया गया, जिससे वाहनों की आवाजाही अब असंभव हो गई है।

एसडीएम लैलूंगा भरत कौशिक ने बताया कि किलकिला, हाडीपानी और कोडामाई के जंगल मार्ग तस्करों के लिए सबसे आसान रास्ते बन चुके थे। इन्हें देखते ही देखते अवरुद्ध कर दिया गया है और अब हर मार्ग पर 24 घंटे पहरा लगाया जा रहा है।

इंटीग्रेटेड कमांड सिस्टम सक्रिय — हर कदम पर डिजिटल निगरानी

कलेक्टर चतुर्वेदी ने बताया कि जिला स्तर पर इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से—

धान की रीसाइक्लिंग पर रोक,

बिचौलियों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग,

और धान की आवाजाही की सतत ट्रैकिंग


रियल टाइम में की जा रही है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध वाहन या गतिविधि की सूचना तुरंत
टोल-फ्री नंबर 1800-233-3663
पर दें।

पहली रात भी अवरुद्ध किए गए थे सात प्रमुख जंगल मार्ग

शुक्रवार की रात घरघोड़ा एसडीएम के नेतृत्व में सात महत्वपूर्ण अंदरूनी रास्तों को बंद किया गया था। तस्कर नए मार्ग तलाश न सकें, इसलिए आज प्रशासन ने दूसरी श्रृंखला की कार्रवाई कर सभी अतिरिक्त संभावित रास्तों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और जहां भी अवैध परिवहन की slightest संभावना दिखेगी, तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।




तस्करी पर ‘फुल-स्टॉप’ लगाने की निर्णायक शुरुआत

दो दिनों की लगातार और कड़ी कार्रवाई ने प्रशासन की मंशा स्पष्ट कर दी है—
धान तस्करी अब जिले में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जंगलों के रास्ते हों, नदियों के किनारे हों या पगडंडी—हर मार्ग की निगरानी और नियंत्रण से अब तस्करों की कमर टूटती दिखाई दे रही है।

रायगढ़ प्रशासन की यह सख्त रणनीति न केवल धान खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी, बल्कि बिचौलियों और अवैध कारोबारियों को भी बड़े संदेश दे रही है कि इस बार कानून को धक्का देकर निकलना संभव नहीं।

समाचार सहयोगी नरेश राठिया

Amar Chouhan

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