नई गाइडलाइन में जमीन मालिकों को मिलेगा रिकॉर्ड मुआवजा,

Freelance editor Amardeep chauhan @ Raigarh. http://amarkhabar.com
शहर के चारों ओर प्रस्तावित रिंग रोड अब सिर्फ यातायात सुधार की योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जमीन मालिकों के लिए आर्थिक समृद्धि का बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। नई गाइडलाइन दरों के लागू होने के बाद भू-अर्जन के बदले मिलने वाला मुआवजा पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गया है। हालात यह हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में तय चार गुना गुणांक के हिसाब से एक एकड़ जमीन पर करीब एक करोड़ रुपये तक का मुआवजा सामने आ रहा है।
प्रशासन द्वारा नौ गांवों में लगभग 25 हेक्टेयर (करीब 60 एकड़) भूमि का चिह्नांकन किया जा चुका है। मौजूदा आकलन के अनुसार केवल जमीन और पुनर्वास मद को मिलाकर ही प्रशासन को करीब 50 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। यह राशि इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में इन गांवों की जमीन की कीमतें किस ऊंचाई पर पहुंचने वाली हैं।
नई दरें
करीब सात वर्षों बाद गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा और सबसे बड़ा लाभ रिंग रोड से प्रभावित जमीन मालिकों को मिल रहा है। कई गांवों में दरें डेढ़ गुना तक बढ़ चुकी हैं, और इन्हीं नई दरों पर चार गुना मुआवजे का प्रावधान लागू होगा।
उदाहरण के तौर पर भेलवाटिकरा गांव को देखें। यहां 3.02 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। नई गाइडलाइन के अनुसार अंदरूनी जमीन का रेट भी इतना है कि कुल मूल्य करीब 1.27 करोड़ रुपये बैठता है। इस पर चार गुना मुआवजा जोड़ें तो आंकड़ा सीधे 5 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच जाता है। इसके अलावा प्रत्येक खातेदार को पुनर्वास के रूप में अलग से राशि मिलेगी और परिसंपत्तियों (मकान, पेड़, कुएं आदि) का मूल्यांकन अलग से किया जाएगा।
पुरानी दरों से तुलना करें तो फर्क साफ
यदि यही जमीन पुरानी गाइडलाइन के हिसाब से अधिग्रहित होती, तो चार गुना मुआवजा मिलाकर भी रकम करीब 3.20 करोड़ रुपये तक सीमित रहती। यानी नई गाइडलाइन ने एक ही झटके में जमीन मालिकों की जेब में करीब दो करोड़ रुपये अतिरिक्त डाल दिए हैं।
रिंग रोड के बाद कीमतें और चढ़ेंगी
जानकारों का मानना है कि रिंग रोड निर्माण पूरा होते ही इन गांवों की जमीनों की बाजार कीमतें कई गुना बढ़ जाएंगी। अगली गाइडलाइन दरों में यहां और बड़ी छलांग लगना तय माना जा रहा है। यही वजह है कि अभी से भूमाफिया सक्रिय हो गए हैं और रिंग रोड के किनारे आने वाली जमीनों पर नजरें टिकाए बैठे हैं।
प्रशासन ने पहले ही सतर्कता बरतते हुए रायगढ़ और पुसौर तहसील के कुल 11 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई थी, ताकि वास्तविक जमीन मालिकों को पूरा और न्यायोचित मुआवजा मिल सके।
किन गांवों की कितनी जमीन
रिंग रोड के लिए जिन गांवों में भूमि का चिह्नांकन हुआ है, उनमें भेलवाटिकरा, रेगड़ा, भिखारीमाल, गोपालपुर, पंडरीपानी, जुर्डा, नवापाली, दर्रामुड़ा और मिड़मिड़ा शामिल हैं। कुल मिलाकर 24.97 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है।
प्रशासन का कहना है
यह परियोजना जमीन छिनने की नहीं, बल्कि जमीन से भविष्य संवारने की कहानी बनती जा रही है। नई गाइडलाइन दरें, चार गुना मुआवजा, पुनर्वास पैकेज और परिसंपत्तियों का अलग भुगतान—ये सभी मिलकर रिंग रोड को प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा और नए अवसरों का द्वार खोल रहे हैं।
रायगढ़ के विकास की इस सड़क पर, जमीन मालिकों के हिस्से में अब सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि स्थायी समृद्धि भी आती दिख रही है।