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सरहद की लकीर पर अटका किसान का हल: राजपुर के किसान ने जमीन सीमांकन के लिए तहसीलदार से लगाई गुहार

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

लैलूंगा (रायगढ़)।
खेती-किसानी का मौसम शुरू होते ही खेतों की मेड़ और सीमाओं को लेकर होने वाली उलझनें ग्रामीण इलाकों में अक्सर विवाद की वजह बन जाती हैं। रायगढ़ जिले की लैलूंगा तहसील के ग्राम राजपुर में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ एक किसान अपनी ही जमीन की सही सीमा तय कराने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाने को विवश हो गया है।

ग्राम राजपुर निवासी राकेश कुमार बेहरा, पिता स्वर्गीय कीर्तन प्रसाद बेहरा ने अपनी पुश्तैनी जमीन के सीमांकन के लिए तहसीलदार न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया है। किसान का कहना है कि जमीन की स्पष्ट सीमा निर्धारित न होने के कारण उन्हें खेती के काम में लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है। खेत की सही मेड़ और सरहद तय न होने से वे अपनी जमीन का पूरा और सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

जमीन का विवरण

आवेदक के अनुसार उनके नाम पर ग्राम राजपुर में कुल 1.280 हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज है, जो दो अलग-अलग खसरों में स्थित है।

खसरा नंबर 380/6 – रकबा 0.6760 हेक्टेयर

खसरा नंबर 327/2 – रकबा 0.6040 हेक्टेयर

कुल किता – 02


किसान ने बताया कि वर्षों से खेत की मेड़ स्पष्ट नहीं होने के कारण कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती है, जिससे खेती के काम प्रभावित होते हैं और भविष्य में विवाद की आशंका भी बनी रहती है।

राजस्व कानून के तहत की गई मांग

राकेश कुमार बेहरा ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 129 के तहत तहसीलदार न्यायालय में सीमांकन के लिए आवेदन किया है। उन्होंने आग्रह किया है कि हल्का पटवारी (क्रमांक 03) तथा राजस्व निरीक्षक (आर.आई.) लैलूंगा की मौजूदगी में उनकी जमीन का विधिवत सीमांकन कराया जाए, ताकि खेत की वास्तविक सीमा स्पष्ट हो सके।

किसान ने बताया कि उन्होंने सीमांकन के लिए आवश्यक शुल्क भी जमा कर दिया है। इसके लिए बैंक चालान क्रमांक J-2277726259 के माध्यम से राशि अदा की जा चुकी है। आवेदन के साथ बी-1 प्रतिलिपि, खसरा विवरण और आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।

राकेश कुमार बेहरा कहते हैं,
“सीमांकन नहीं होने से खेती के काम में बाधा आ रही है। नियम के अनुसार शुल्क जमा कर दिया है और अब प्रशासन से उम्मीद है कि जल्द कार्रवाई कर जमीन की पैमाइश कराई जाएगी।”

ग्रामीणों के लिए भी महत्वपूर्ण है समय पर सीमांकन

ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की मेड़ और सीमांकन स्पष्ट न होने से अक्सर आपसी विवाद की स्थिति बन जाती है। राजस्व विभाग द्वारा समय पर सीमांकन कराए जाने से न केवल किसानों को राहत मिलती है, बल्कि गांवों में शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

अब इस मामले में गेंद राजस्व विभाग के पाले में है। देखना होगा कि लैलूंगा प्रशासन इस आवेदन पर कितनी तत्परता दिखाता है और कब तक किसान की जमीन का सीमांकन कराकर उसे राहत दिलाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि खेती के इस महत्वपूर्ण समय में यदि प्रशासन जल्द पहल करे तो किसान बिना किसी विवाद और संशय के अपने खेतों में काम कर सकेंगे।

Amar Chouhan

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