शादी का झांसा देकर नाबालिग के शोषण का आरोप, पुलिस ने 24 घंटे में आरोपी को किया गिरफ्तार

अभियान संवेदना के तहत कार्रवाई, पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की धाराओं में अपराध दर्ज; न्यायालय के आदेश पर आरोपी जेल भेजा गया
रायगढ़/खरसिया, 15 अक्टूबर 2026। नाबालिग से कथित शारीरिक शोषण के एक मामले में खरसिया पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता की शिकायत के अनुसार, आरोपी ने शादी का भरोसा दिलाकर करीब दो वर्षों तक उसका शारीरिक शोषण किया। पीड़िता ने यह भी बताया कि वह करीब चार माह की गर्भवती है और अब आरोपी शादी करने से इनकार कर रहा है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई महिला एवं बालिकाओं से संबंधित अपराधों पर त्वरित कार्रवाई के लिए संचालित ‘अभियान संवेदना’ के तहत की गई है। मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद खरसिया पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज कराए और नियमानुसार मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद आरोपी की तलाश कर उसे हिरासत में लिया गया।
परिचय से शुरू हुई बातचीत, शादी के भरोसे का आरोप
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता का सितंबर 2024 में खरसिया के अटल आवास क्षेत्र में रहने वाले युवक छोटू राजपूत से परिचय हुआ था। आरोप है कि युवक ने अपना मोबाइल नंबर देकर उससे बातचीत शुरू की। पीड़िता ने अपने आवेदन में बताया कि 22 सितंबर 2024 को आरोपी उसे घुमाने के बहाने खरसिया के जंगल की ओर ले गया, जहां शादी करने का प्रलोभन देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद भी आरोपी ने कई बार उसका शारीरिक शोषण किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वह वर्तमान में करीब चार माह की गर्भवती है। जब उसने आरोपी से शादी करने की बात कही, तो उसने कथित तौर पर शादी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस चौकी खरसिया पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद सक्रिय हुई पुलिस, आरोपी के घर दबिश
पुलिस विज्ञप्ति के अनुसार, पीड़िता ने 14 अक्टूबर 2026 को चौकी खरसिया में लिखित आवेदन दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए चौकी प्रभारी निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी ने एसडीओपी खरसिया सतीश भार्गव के मार्गदर्शन में कार्रवाई शुरू की। महिला विवेचक के माध्यम से पीड़िता के कथन दर्ज किए गए और उसकी शिकायत के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई।
इस मामले में थाना खरसिया में अपराध क्रमांक 528/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया। पुलिस टीम ने आरोपी के घर दबिश देकर उसे हिरासत में लिया। पूछताछ और आवश्यक वैधानिक औपचारिकताओं के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय से न्यायिक रिमांड मिलने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया।
इन पुलिसकर्मियों की रही भूमिका
कार्रवाई में चौकी प्रभारी निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी, प्रशिक्षु उप निरीक्षक प्रिया साहू, महिला प्रधान आरक्षक ममता मिंज तथा आरक्षक धनंजय कश्यप, कीर्ति सिदार, साविल चंद्रा, सिदार सिंह और गोविन्द बनर्जी की भूमिका रही।
नाबालिग से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता जरूरी
नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में त्वरित कार्रवाई के साथ पीड़ित की पहचान और गरिमा की रक्षा करना भी बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में कानून के तहत पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए। पुलिस ने इस प्रकरण में आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उसे न्यायिक रिमांड पर भेजा है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के परीक्षण से होगी।
(स्रोत: रायगढ़ पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति, दिनांक 15 अक्टूबर 2026)
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