शक की आग में टूटा एक परिवार: जूटमिल में पत्नी की नृशंस हत्या, पति गिरफ्तार

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़, 02 जनवरी 2026।
नववर्ष की पहली रात रायगढ़ के जूटमिल थाना क्षेत्र में एक ऐसा दर्दनाक और दिल दहला देने वाला अपराध सामने आया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। चरित्र शंका के जहर ने एक पति को हत्यारा बना दिया और एक मासूम महिला की जिंदगी बेरहमी से खत्म हो गई।
घटना सांगीतराई नहरपार क्षेत्र की है। बुधवार रात जूटमिल पुलिस को सूचना मिली कि नहर किनारे झाड़ियों में एक महिला का शव पड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। थाना जूटमिल की टीम एफएसएल अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची, जहां झाड़ियों के बीच एक युवती का रक्तरंजित शव बरामद हुआ। मृतिका की पहचान निशा चौहान (30 वर्ष) के रूप में हुई।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कहानी की परतें खुलती चली गईं। पुलिस ने मृतिका के पति सेतुलाल चौहान (34 वर्ष) को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी टूट गया और उसने जो स्वीकारोक्ति की, वह रिश्तों की संवेदनहीनता और हिंसा की भयावह तस्वीर पेश करती है।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि 01 जनवरी 2026 को वह अपनी पत्नी को स्कूटी में बैठाकर सांगीतराई नहरपार ले गया था। रास्ते में और फिर नहर किनारे दोनों के बीच विवाद हुआ। विवाद की जड़ वही पुराना शक था—पत्नी के चरित्र को लेकर संदेह। इसी संदेह ने आरोपी की सोच पर इस कदर कब्जा कर लिया कि उसने अपने साथ लाए लोहे के धारदार कत्ता से पत्नी पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। मौके पर ही निशा की मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी ने शव को नहर के नीचे झाड़ियों में छुपा दिया, मानो सच को हमेशा के लिए दफन कर देना चाहता हो।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। हत्या के बाद भी आरोपी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। वह स्कूटी से सीधे उस युवक के घर पहुंचा, जिससे उसे अपनी पत्नी की मित्रता होने का शक था। वहां भी आरोपी ने धारदार कत्ता से युवक पर जानलेवा हमला कर दिया। गनीमत रही कि युवक किसी तरह जान बचाकर मौके से फरार हो गया, वरना यह मामला दोहरी हत्या में बदल सकता था।
पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त धारदार कत्ता और स्कूटी बरामद की गई। थाना जूटमिल में अपराध क्रमांक 01/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 एवं 109(1) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 के अंतर्गत मामला दर्ज कर आरोपी को विधिवत गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पूरी कार्रवाई में निरीक्षक प्रशांत राव के नेतृत्व में सहायक उप निरीक्षक भागीरथी चौधरी, प्रधान आरक्षक सतीश पाठक एवं थाना स्टाफ की अहम भूमिका रही।
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए एक कठोर सवाल भी है—क्या शक इतना बड़ा हो सकता है कि वह रिश्तों, संवेदनाओं और इंसानियत को ही खत्म कर दे? जूटमिल की यह वारदात एक बार फिर साबित करती है कि अविश्वास और हिंसा का रास्ता अंततः केवल विनाश की ओर ही ले जाता है।
समाचार सहयोगी सिकंदर चौहान