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अनावरी पर धान खरीदी से भड़का किसान आक्रोश: लिबरा में तहसीलदार का घेराव, कई केंद्रों पर चक्काजाम जैसे हालात

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़।
जिले में अनावरी के आधार पर धान खरीदी को लेकर किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। लिबरा और कुडुमकेला सहित कई धान उपार्जन केंद्रों में शुक्रवार को हालात तनावपूर्ण हो गए, जहां किसानों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कम मात्रा में धान खरीदे जाने से नाराज किसानों ने हंगामा किया और कुछ स्थानों पर चक्काजाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई।

कुडुमकेला उपार्जन केंद्र में उस समय विवाद बढ़ गया, जब किसानों से 21 क्विंटल की जगह मात्र 16 क्विंटल धान खरीदे जाने की बात सामने आई। इससे आक्रोशित किसानों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही तहसीलदार मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास करते रहे। काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

धान खरीदी को लेकर जिले के अन्य केंद्रों में भी असंतोष की स्थिति बनी हुई है। किसानों का आरोप है कि अनावरी के नाम पर उनकी उपज को जानबूझकर कम आंकलन किया जा रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि रोज किसी न किसी केंद्र से विरोध और हंगामे की खबर सामने आ रही है।

इधर प्रशासन ने कोचियों और बिचौलियों पर लगाम कसने के लिए सख्ती जरूर बढ़ाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं दिख रहे। खरसिया क्षेत्र में सक्ती जिले की राइस मिलों से धान पहुंचने की शिकायतें सामने आई हैं, जिसे किसानों के माध्यम से खरीदी केंद्रों तक लाया गया। वहीं लैलूंगा क्षेत्र में भी ओडिशा का धान वैकल्पिक रास्तों से उपार्जन केंद्रों तक पहुंचने की जानकारी मिल रही है।

लिबरा समिति में ओडिशा के धान के खपने के आरोप लग रहे हैं, जबकि धरमजयगढ़ और कापू की समितियों में जशपुर जिले से धान आने की चर्चाएं तेज हैं। इन आरोपों ने पूरी खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आज होगी अहम बैठक

धान खरीदी को लेकर बढ़ते विवाद और अव्यवस्थाओं के बीच कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने 3 जनवरी को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई है। बैठक में सभी एसडीएम, जिला नोडल अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और समिति प्रबंधकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में खरीदी की स्थिति, अनियमितताओं और किसानों की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा किए जाने की संभावना है।

कुल मिलाकर, धान खरीदी का मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों के सब्र की परीक्षा बन चुका है। यदि समय रहते ठोस समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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Amar Chouhan

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