बुढ़िया नर्सरी CPT घोटाले पर विभाग की चुप्पी गहरी, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम तमनार/रायगढ़। बुढ़िया नर्सरी में मशीनों से 100% CPT कार्य कराने और उसे कागजों में मजदूरों से कराया हुआ दिखाने के खुलासे ने वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हमारे द्वारा उजागर की गई अनियमितताओं के बाद भी विभागीय स्तर पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह चुप्पी स्वयं कई संकेत दे रही है—क्या विभाग मामले को दबाने की तैयारी में है, या कार्रवाई का इंतजार अभी बाकी है?
सूत्र बताते हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों तक जानकारी पहुँचने के बाद भी न तो स्पॉट निरीक्षण किया गया है और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी से जवाब-तलब की प्रक्रिया शुरू हुई है। वहीं ग्रामीणों और हितग्राहियों में रोष इस कदर बढ़ गया है कि वे अब इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग के लिए सामूहिक ज्ञापन देने की तैयारी कर रहे हैं।
इस संवेदनशील मामले में दो बड़े सवाल विभाग की छवि पर सीधे प्रहार कर रहे हैं—
पहला, वर्ष 2025–26 के CPT कार्यों में मजदूरों को रोजगार देने का दावा कैसे किया गया, जब पूरा काम मशीनों से कराया गया?
दूसरा, बजट और मजदूरी के मद में हुए भुगतान का वास्तविक हिसाब–किताब कहाँ है?
जानकारी मिली है कि यदि विभाग जल्द इस पर कार्रवाई नहीं करेगा, तो मामला उच्च स्तर तक पहुँचेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक नर्सरी में इतनी बड़ी अनियमितता मिली है, तो अन्य CPT कार्यों की भी जांच अनिवार्य है। कई लोगों का यह भी आरोप है कि इस खेल में रेंज स्तर से लेकर उच्च कार्यालय तक कुछ लोग शामिल हो सकते हैं, इसलिए मामले को दबाने की कोशिशें हो रही हैं।
दूसरी ओर, विशेषज्ञों का कहना है कि CPT कार्य मशीनों से कराना न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि यह हितग्राहियों के रोजगार अधिकार का सीधा हनन भी है। इससे विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, और यदि तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला भ्रष्टाचार की बड़ी तस्वीर के रूप में सामने आ सकता है।
अब लगातार बढ़ते जनदबाव व मीडिया की चौकस निगाहों के बीच सवाल उठ रहा है—
क्या विभाग इस खुलासे को गंभीरता से लेकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा?
या यह मामला भी कई अन्य फाइलों की तरह धीरे–धीरे कागजी धूल में दबा दिया जाएगा?
फिलहाल, विभाग की खामोशी इस पूरे प्रकरण को और भी संदिग्ध बना रही है।
जनता जवाब चाहती है, और जवाब अब विभाग को देना ही होगा।
समाचार सहयोगी: नरेश राठिया