भरोसे की कीमत: IDBI बैंककर्मी ने ‘एफडी’ के नाम पर दंपत्ति के 40 लाख उड़ा दिए, धरसींवा पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायपुर/धरसींवा।
बैंकों को आमतौर पर लोगों की जीवनभर की कमाई का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। लेकिन जब इसी भरोसे की चौखट के भीतर सेंध लग जाए तो पीड़ितों के लिए यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि विश्वास के टूटने की कहानी बन जाती है। रायपुर जिले के धरसींवा थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक बैंककर्मी ने ग्राहकों का भरोसा जीतकर उनके खातों से लाखों रुपये हड़प लिए।
धरसींवा पुलिस ने आईडीबीआई बैंक की चरौदा शाखा से जुड़े एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने फिक्स डिपॉजिट (एफडी) कराने के नाम पर एक दंपत्ति के खाते से करीब 40 लाख रुपये निकाल लिए। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
एफडी के नाम पर लिया विश्वास, फिर किया खेल
पुलिस के अनुसार इस मामले की शिकायत नरेन्द्र वर्मा ने थाना धरसींवा में दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनका और उनकी पत्नी मनीषा वर्मा का खाता आईडीबीआई बैंक की चरौदा शाखा में है। दोनों के खातों में लगभग 20-20 लाख रुपये जमा थे।
वर्ष 2023 में दंपत्ति ने इन पैसों को सुरक्षित निवेश के तौर पर फिक्स डिपॉजिट कराने का निर्णय लिया। इसी सिलसिले में वे बैंक के कर्मचारी राजा खुंटे से मिले।
शिकायत के अनुसार आरोपी बैंककर्मी ने एफडी खोलने की प्रक्रिया बताकर दंपत्ति से आधार कार्ड और पैन कार्ड की प्रतियां लीं और प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर दो ब्लैंक चेक भी मांगे। बैंक कर्मचारी होने के कारण दंपत्ति ने बिना किसी संदेह के चेक पर हस्ताक्षर कर उसे सौंप दिए। आरोपी ने उन्हें एफडी खुलने की पावती भी दे दी, जिससे उन्हें भरोसा हो गया कि रकम सुरक्षित निवेश हो गई है।
तीन साल बाद खुला राज
समय गुजरता गया और दंपत्ति को यह अंदाजा भी नहीं था कि उनके साथ धोखा हो चुका है।
2 मार्च 2026 को जब नरेन्द्र वर्मा ने निजी जरूरत के चलते एफडी तुड़वाने की बात कही, तब बैंककर्मी ने गोलमोल जवाब देते हुए पैसों में गड़बड़ी होने की बात कह दी।
संदेह होने पर दंपत्ति स्वयं बैंक पहुंचे और खाते की जानकारी ली। बैंक रिकॉर्ड खंगालने पर जो तथ्य सामने आए, उसने उन्हें स्तब्ध कर दिया।
जांच में पता चला कि आरोपी ने दिए गए ब्लैंक चेक का दुरुपयोग करते हुए अलग-अलग तारीखों में खाते से कुल 40 लाख रुपये निकाल लिए थे।
पुलिस जांच में खुली परतें
शिकायत मिलने के बाद धरसींवा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत अपराध दर्ज किया।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस ने बैंक के दस्तावेज, खाते के स्टेटमेंट और एफडी से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान आरोपी बैंककर्मी की भूमिका स्पष्ट हो गई। इसके बाद पुलिस ने उसकी पतासाजी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजा खुंटे (35 वर्ष) के रूप में हुई है। वह मूल रूप से ग्राम जुनवानी, थाना पलारी, जिला बलौदा बाजार का निवासी है और वर्तमान में महुआ चौक, सिलयारी में रह रहा था।
एक और बैंक घोटाले का खुलासा
धरसींवा क्षेत्र में इसी तरह का एक और मामला भी सामने आया है, जिसमें ग्राहकों के खातों से लाखों रुपये का गबन किया गया।
पुलिस के अनुसार गोवर्धन प्रसाद दीवान और उनकी पत्नी के खाते से 8 लाख 70 हजार रुपये तथा स्वाति वर्मा के खाते से 7 लाख रुपये निकाल लिए गए। इस तरह कुल 15 लाख 70 हजार रुपये का गबन किया गया।
इस मामले में पुलिस ने दुर्गेश शर्मा उर्फ सन्नी (30 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। वह ग्राम टेंगाभाठा, थाना बेरला, जिला बेमेतरा का निवासी है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
भरोसे पर सवाल
दोनों घटनाओं ने बैंकिंग व्यवस्था में ग्राहकों के भरोसे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग लेनदेन में ब्लैंक चेक या दस्तावेज बिना पढ़े सौंपना भारी पड़ सकता है।
फिलहाल धरसींवा पुलिस दोनों मामलों की विस्तृत जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इस तरह के और भी खाते तो इस जालसाजी का शिकार नहीं हुए।
जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।