बड़े भंडार अदाणी प्लांट में उबाल: ओवरटाइम, बकाया वेतन और अव्यवस्था के खिलाफ श्रमिकों का ‘हल्ला बोल’

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 18 मार्च। औद्योगिक जिले रायगढ़ के पुसौर स्थित बड़े भंडार में सोमवार की सुबह उस वक्त माहौल गरमा गया, जब अडानी पॉवर के प्लांट में कार्यरत सैकड़ों श्रमिक और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर मुख्य द्वार पर डट गए। नारेबाजी, आक्रोश और लंबित वेतन की पीड़ा—इन तीनों ने मिलकर एक ऐसा दृश्य खड़ा किया, जिसने न केवल प्रबंधन को कठघरे में खड़ा किया बल्कि प्रशासन को भी तत्काल हस्तक्षेप के लिए मजबूर कर दिया।
ओवरटाइम की मार, जेब खाली
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों का आरोप साफ था—“काम 12 से 14 घंटे, लेकिन भुगतान सिर्फ तय समय का।” कर्मचारियों ने बताया कि बीते कई महीनों से न केवल ओवरटाइम का भुगतान रोका जा रहा है, बल्कि नियमित वेतन भी समय पर नहीं मिल रहा। ऐसे में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
कुछ श्रमिकों ने तो यहां तक कहा कि “ओवरटाइम” अब सिर्फ कागजों में रह गया है, जमीन पर उसका कोई अस्तित्व नहीं।
सुरक्षा और सुविधाओं पर भी सवाल
मामला केवल वेतन तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शन के दौरान कई श्रमिकों ने कार्यस्थल की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि लगातार लंबे समय तक काम लेने के बावजूद न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं और न ही कार्यस्थल पर जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
सिंगरौली की घटना के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
यह विरोध उस समय सामने आया है, जब हाल ही में मध्यप्रदेश के सिंगरौली स्थित अदाणी पावर प्लांट में एक श्रमिक की मौत के बाद हिंसक विरोध देखने को मिला था। उस घटना ने श्रमिक असंतोष को और अधिक उग्र बना दिया है, जिसका असर अब रायगढ़ तक साफ दिख रहा है।

प्रशासन की एंट्री, 25 मार्च तक अल्टीमेटम
स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। महेश शर्मा (एसडीएम) ने स्वयं श्रमिकों और प्रबंधन के बीच बातचीत कराई। काफी देर तक चली तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बाद प्रशासन ने कंपनी को 25 मार्च तक का समय देते हुए विवाद सुलझाने का अल्टीमेटम दिया।
प्रशासन के आश्वासन के बाद फिलहाल श्रमिकों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है, लेकिन चेतावनी साफ है—यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल तय है।
विवादों में घिरता औद्योगिक विस्तार
रायगढ़ में अदाणी समूह की गतिविधियां पिछले कुछ समय से लगातार विवादों के घेरे में हैं। बड़े भंडार का यह श्रमिक आंदोलन कोई पहला मामला नहीं है। इसके अलावा रेल लाइन परियोजना को लेकर आसपास के गांवों में महीनों से धरना जारी है, वहीं तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित कोल माइन को लेकर भी ग्रामीणों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि औद्योगिक विस्तार की आड़ में पर्यावरण, जमीन और जनजीवन से जुड़े मुद्दों की अनदेखी की जा रही है।
प्रबंधन की चुप्पी, सवाल बरकरार
इस पूरे घटनाक्रम पर अडानी ग्रुप की स्थानीय इकाई की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि ठेकेदारों और श्रमिकों के बीच संवाद स्थापित कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
बड़े भंडार का यह घटनाक्रम सिर्फ एक प्लांट का विवाद नहीं, बल्कि उस व्यापक असंतोष का संकेत है जो औद्योगिक क्षेत्रों में धीरे-धीरे पनप रहा है। 25 मार्च की तय समयसीमा अब निर्णायक मानी जा रही है—यह तय करेगी कि मामला बातचीत से सुलझेगा या फिर रायगढ़ की औद्योगिक फिजा में हड़ताल की नई आहट गूंजेगी।
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