तमनार के सुदूर गांव से उठी शिक्षा की रोशनी: नवाचारी प्रधान पाठक चन्द्रमणी चौहान को राज्य स्तरीय सम्मान

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़। संसाधनों की कमी के बीच भी शिक्षा की अलख जलाए रखने वाले शिक्षक जब सम्मानित होते हैं, तो वह केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन जाती है। तमनार विकासखंड के सुदूर ग्राम केरा खोल स्थित प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ प्रधान पाठक चन्द्रमणी चौहान को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान और नवाचारी प्रयासों के लिए राज्य स्तरीय “एजुकेशन स्कल्पटर अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान 26 सितंबर 2026 को रायपुर स्थित कलिंगा यूनिवर्सिटी में आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रदान किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की उपस्थिति रही। इस दौरान राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम तथा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ संदीप गाँधी ने संयुक्त रूप से श्री चौहान को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
नवाचार से बदली स्कूल की तस्वीर
जानकारी के अनुसार, चन्द्रमणी चौहान ने अपने विद्यालय में पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़ते हुए कई नवाचारी प्रयोग किए हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए स्थानीय परिवेश पर आधारित शिक्षण सामग्री, गतिविधि-आधारित कक्षाएं और नियमित सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया गया।
ग्रामीण अंचल में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए उन्होंने अभिभावकों के साथ निरंतर संवाद स्थापित किया, जिससे विद्यालय में उपस्थिति और बच्चों की सीखने की क्षमता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।
दूरस्थ अंचल में शिक्षा का दीप
तमनार जैसे दूरस्थ क्षेत्र में कार्य करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन श्री चौहान ने इसे अवसर में बदलते हुए शिक्षा को समाज से जोड़ने का प्रयास किया। उनके नेतृत्व में विद्यालय न केवल पढ़ाई का केंद्र बना, बल्कि बच्चों के समग्र विकास के लिए एक सक्रिय मंच के रूप में भी उभरा है।
क्षेत्र में खुशी की लहर
इस उपलब्धि की खबर मिलते ही क्षेत्र में खुशी का माहौल है। सहकर्मियों, मित्रों और स्थानीय नागरिकों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस तरह के सम्मान उन शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।
प्रेरणा का संदेश
चन्द्र मणी चौहान की यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि यदि समर्पण और नवाचार का साथ हो, तो सीमित संसाधन भी बाधा नहीं बनते। ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में ऐसे प्रयास मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
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