तमनार में तनाव के बाद पुनः संयम की राह—शांतिपूर्ण धरने की वापसी, ग्रामीणों पर कार्रवाई न करने की उठी सर्वसम्मत मांग (देखें वीडियो)

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम तमनार (रायगढ़)।
कल दिनांक 27 दिसम्बर क़ो हुए अप्रत्याशित बवाल के बाद तमनार एक बार फिर संयम और संवाद की ओर लौटता नजर आया। शनिवार शाम को ही क्षेत्र में (गाँधीवादी) अहिंसात्मक, शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन दोबारा शुरू हो गया, जहां ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे संघर्ष नहीं, बल्कि न्याय और सम्मानजनक सुनवाई चाहते हैं। धरना स्थल पर माहौल शांत रहा और प्रदर्शन पूरी तरह अहिंसक तरीके से संचालित किया गया।
धरने में जुटे ग्रामीणों और सामाजिक, संगठन प्रतिनिधियों ने एक नई और अहम मांग रखी—कल हुए हंगामे की आड़ में किसी भी ग्रामीण के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई न की जाए। वक्ताओं ने कहा कि हालात अचानक बिगड़े, लेकिन उसका खामियाजा पूरे गांव या निर्दोष लोगों को भुगतना पड़े, यह न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप। ज्ञापन में पहले ही स्पष्ट रूप से कह दिया गया रहा की किसी भी प्रकार के विकट स्थिति की जिम्मेवारी प्रशासन की होएगी।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे मुद्दों पर संवाद की कमी और प्रशासनिक अनदेखी ने असंतोष को जन्म दिया। कल की घटना को वे उसी असंतोष की परिणति मानते हैं, न कि किसी सुनियोजित हिंसा का परिणाम। इसी आधार पर धरना स्थल से प्रशासन से अपील की गई कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और बिना किसी ठोस साक्ष्य के किसी पर भी कानूनी शिकंजा न कसा जाए। वे शांतिपूर्ण आंदोलन के पक्षधर हैं।
धरने में शामिल ग्रामीण नेताओं ने बार-बार शांति बनाए रखने पर जोर दिया। लाउडस्पीकर से की जा रही घोषणाओं में लोगों से संयम बरतने और किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई से दूर रहने की अपील होती रही। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति ने धरने को सामाजिक समर्थन का रूप दे दिया।
प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, हालांकि धरना स्थल पर पुलिस की मौजूदगी सीमित और दूरी बनाए हुए दिखी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना गया और किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं हुई, तो हालात पूरी तरह सामान्य होने में देर नहीं लगेगी।

फिलहाल तमनार में शांति कायम है, लेकिन यह शांति उम्मीदों पर टिकी है—उम्मीद संवाद की, न्याय की और ऐसे फैसलों की जो हालात को और बिगाड़ने के बजाय भरोसा बहाल करें।