उज्जैन वाले दु:खहर्ता बाबा उमाकान्त जी महाराज का भव्य आध्यात्मिक सत्संग व नामदान कार्यक्रम रायगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न…

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम :- जिला रायगढ़ के बोईरदादर स्थित ग्रीनसिटी रोड, शालिनी स्कूल के समीप कंवर भवन के बगल मैदान पर 10 एवं 11 जनवरी 2026 को विश्व विख्यात परम संत बाबा जय गुरुदेव जी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, उज्जैन वाले वक्त के पूरे संत दु:खहर्ता बाबा उमाकान्त जी महाराज के सान्निध्य में दो दिवसीय भव्य आध्यात्मिक सत्संग एवं नामदान कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत श्रद्धा व उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
इस ऐतिहासिक सत्संग में बाबा उमाकान्त जी महाराज ने अपने ओजस्वी और विचारोत्तेजक प्रवचनों के माध्यम से समाज, राजनीति और प्रशासन से जुड़े लोगों को जीवन की सच्ची दिशा दिखाते हुए कहा कि दिल, दिमाग और बुद्धि का सीधा संबंध मनुष्य के आचरण और खान-पान से है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग मांस, अंडा, शराब और नशे जैसी गंदी चीज़ों का सेवन करते हैं, उनका खून दूषित हो जाता है, जिससे उनकी सोच और निर्णय क्षमता प्रभावित होती है। वहीं शाकाहारी, नशामुक्त और चरित्रवान व्यक्ति ही सही मायनों में जनता का दिल जीत पाते हैं और अच्छे कार्य कर पाते हैं।

बाबा उमाकान्त जी महाराज ने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में कई ऐसे नेता हैं जो शाकाहारी और नशामुक्त जीवन अपनाकर वर्षों से जनसेवा कर रहे हैं और कोई उन्हें उनके पद से हटा नहीं सका। उन्होंने कहा कि अच्छा आचरण, संयम और शुद्ध जीवन ही स्थायी सफलता की कुंजी है। देश के प्रधानमंत्री से लेकर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने शाकाहार, नशामुक्ति और चरित्र निर्माण के महत्व को रेखांकित किया।
*संत प्रवचन के दौरान बाबा जी ने कहा—*
“आगे बढ़ना है तो गंदी चीज़ों को छोड़कर अच्छाई को अपनाना होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि कलयुग में ही सतयुग आएगा, लेकिन इसके लिए समाज को व्यभिचार, नशा और अनैतिकता छोड़कर संतमत की साधना अपनानी होगी। उन्होंने ब्रह्मचर्य का अर्थ समझाते हुए कहा कि पुरुष पराई स्त्री से और स्त्री पराए पुरुष से गलत कर्म न करें — यही सच्चा ब्रह्मचर्य है।

सत्संग के दौरान बाबा जी द्वारा गूंजे ये संदेश जनमानस को गहराई से प्रभावित करते नजर आए—
“हाथ जोड़कर विनय हमारी, तजो नशा बनो शाकाहारी।”
“छोड़ो व्यभिचार बनो ब्रह्मचारी, सतयुग लाने की करो तैयारी।”
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह सत्संग कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया गया था, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों और जिलों से जयगुरुदेव पंथ के हजारों अनुयायी रायगढ़ पहुंचे। इस अवसर पर हजारों नए श्रद्धालुओं ने नामदान प्राप्त कर प्रभु से मिलने का आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। दोनों दिनों में लगभग 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन से क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और नशामुक्त जीवन के संदेश का व्यापक प्रसार हुआ, जिससे समाज को सकारात्मक दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
समाचार सहयोगी अशोक राजशिखर