घरघोड़ा नगर पंचायत में बढ़ता असंतोष: सीएमओ पर दुर्व्यवहार और जल संकट की अनदेखी के गंभीर आरोप, एसडीएम से हस्तक्षेप की मांग

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
घरघोड़ा (रायगढ़)।
नगर पंचायत घरघोड़ा में प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) श्रीमती पुष्पा खलखो के खिलाफ जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ कथित दुर्व्यवहार तथा बुनियादी समस्याओं की लगातार अनदेखी को लेकर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को औपचारिक शिकायत सौंपते हुए त्वरित जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
वार्ड क्रमांक 03 के पार्षद भोलू उरांव के नेतृत्व में दिए गए इस शिकायत पत्र में कई जनप्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर कर आरोपों को गंभीर बताया है। शिकायत के अनुसार, 11 अप्रैल 2026 को पार्षद भोलू उरांव और आकाश लहरे नल कनेक्शन से संबंधित समस्या को लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि समस्या सुनने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कह दिया गया। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि पिछले कुछ समय से इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रशासनिक संवाद पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले को और गंभीर बनाता है नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 03 और 04 में बीते तीन महीनों से जारी पेयजल संकट। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बार-बार अवगत कराने के बावजूद समस्या का निराकरण नहीं किया गया है, जिसके चलते स्थानीय नागरिकों को दैनिक जीवन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के इस दौर में पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता की अनदेखी को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जनप्रतिनिधियों ने अपने आवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया और अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं आया, तो स्थिति और विकट हो सकती है। उन्होंने एसडीएम से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही और संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार के व्यवहार के आरोप और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी, दोनों ही मामले प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े करते हैं।
अब देखना होगा कि एसडीएम स्तर पर इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लिया जाता है और क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ठोस कार्रवाई सामने आती है या नहीं। फिलहाल, घरघोड़ा नगर पंचायत का यह मामला प्रशासनिक साख की परीक्षा बनता जा रहा है।