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झिंकाबाहल में रात 1 बजे मौत का साया: अनियंत्रित टेलर घर में घुसा, परिवार बाल-बाल बचा – गुस्से से उबल पड़े ग्रामीण, चक्का जाम जारी

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम

तमनार/रायगढ़।

तमनार विकासखंड के ग्राम झिंकाबाहल में बीती रात एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन घटना ने ग्रामीणों के आक्रोश और सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देर रात लगभग 1 बजे तेज रफ्तार में आया एक अनियंत्रित टेलर वाहन (CG-15 AC 0828) मेन रोड किनारे बने मकान को तोड़ते हुए अंदर घुस गया। हादसे में घर की दीवारें ढह गईं और मलबा कमरे में सो रहे परिवार पर गिरा, हालांकि चमत्कारिक रूप से किसी की जान नहीं गई।




खाट के पास आकर रुका टेलर, कुछ सेकेंड की दूरी पर थी मौत

यह हादसा झिंकाबाहल निवासी समारू राम ओगरे के घर में हुआ। समारू राम ने बताया—

> “रात करीब 1 बजे अचानक जोर का धमाका हुआ। पल भर में दीवार टूटकर गिर गई और टेलर हमारे खाट के बिलकुल किनारे तक आ पहुंचा। हम बस दो सेकेंड की दूरी पर मौत से बचे हैं।”

घटनास्थल पर मौजूद ट्रेलर मालिक संघ

दीवार टूटने के बाद गिरी ईंटें और मलबा दंपत्ति के ऊपर आ गिरा। बच्चे और बुजुर्ग दहशत में घर से बाहर भागे।




किसका वाहन? कंपनी का नाम आया सामने

दुर्घटना कारित वाहन KMAG इंटरनेशनल, बिलासपुर (अर्पित अग्रवाल) के अधीन संचालित बताया गया है, जबकि टेलर का मालिक स्थानीय बताया जा रहा है। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया।




ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, चक्का जाम – सड़क जाम कर धरना शुरू

सुबह होते ही गांव में आक्रोश फैल गया। ग्रामीण बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए और मुआवजे व सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर चक्का जाम कर दिया। गांववालों ने साफ चेतावनी दी है कि—

लगातार बढ़ रही तेज रफ्तार

रोड किनारे बसे घरों पर खतरा

दुर्घटनाओं में कंपनियों और वाहन चालकों की लापरवाही


इन सबके खिलाफ अब कड़ा कदम उठाना जरूरी है।




टेलर मालिक संघ का बयान – “जनता हर रात डर के साए में जी रही है”

तमनार टेलर मालिक संघ के अध्यक्ष दयानंद पटनायक ने भी घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा—

> “ग्रामीण क्षेत्र में भारी वाहनों की स्पीड पर कोई नियंत्रण नहीं है। लोग रातभर डर में रहते हैं। कंपनियों और परिवहनकर्ताओं को अपने वाहनों पर सख्ती करना ही होगी, वरना ऐसी दुर्घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।”






ग्रामीणों की मांगें स्पष्ट – मुआवजा, सुरक्षा उपाय और जिम्मेदारों पर कार्रवाई

ग्रामीणों ने प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—

1. पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा


2. रोड किनारे सुरक्षा व्यवस्था, बैरियर व स्पीड कंट्रोल


3. वाहन संचालकों व कंपनी पर कड़ी कार्रवाई



चक्का जाम अभी जारी है और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंचने का इंतजार ग्रामीणों को है।




झिंकाबाहल की यह घटना स्पष्ट करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तेज रफ्तार भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही जानलेवा स्तर तक पहुंच चुकी है। सौभाग्य से इस बार जान बच गई, लेकिन अगर सख्ती नहीं की गई, तो अगला हादसा विनाशकारी हो सकता है।

प्रशासन के लिए यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि चेतावनी है—
रास्ते और नियम दोनों सुरक्षित नहीं हैं, और जनता अब जवाब चाहती है।

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Amar Chouhan

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