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PM आवास में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: तीन साल से अधूरा मकान, सचिव पर किस्त गबन का आरोप — शिकायत लेकर 100 km दूर रायगढ़ पहुँची महिलाएँ

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम

रायगढ़ / लैलूंगा

प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर ग्रामीणों की आशाओं पर पानी फेरने वाला गंभीर मामला लैलूंगा विकासखंड में सामने आया है। मडियाकछार गांव की पाँच महिला लाभार्थी—कलाराम, सुखमति, हीरामति, सुकमेत और रामबती—अधूरे मकान और किस्त गबन की शिकायत लेकर लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय कर रायगढ़ जिला पंचायत कार्यालय पहुँचीं।

इन महिलाओं का आरोप है कि ग्राम पंचायत मडियाकछार के सचिव अनंत चौहान ने उनकी तीनों किस्तें—पहली, दूसरी और तीसरी—बैंक से निकालकर गबन कर लीं और मकान अधूरा ही छोड़ दिया।




तीन साल से रुका निर्माण, बार-बार नोटिस पर भी नहीं हुआ काम

सरकारी योजना के तहत स्वीकृति मिलने के बाद ग्रामीण महिलाओं ने मकान निर्माण शुरू किया, लेकिन उम्मीद के विपरीत तीन साल बीतने के बाद भी आवास पूरा नहीं हुआ। पंचायत सचिव ने उन्हें यह कहकर भरोसा दिलाया था कि वह स्वयं मकान पूरा करवाएगा, परन्तु किस्त मिलने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया।

अधिकारियों द्वारा कई बार नोटिस भेजने के बाद भी काम आगे नहीं बढ़ा। जब ग्रामीण महिलाओं को पता चला कि शासन की ओर से पूरी राशि पहले ही जारी हो चुकी है, तब पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ।




लैलूंगा में शिकायत अनसुनी, मजबूर होकर रायगढ़ पहुँची महिलाएँ

महिलाओं ने कई बार लैलूंगा पंचायत व विकासखंड स्तर पर शिकायत की, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। निराश होकर वे गुरुवार को रायगढ़ पहुँचीं और रातभर केवड़ाबड़ी बस स्टैंड पर ठहरने के बाद शुक्रवार सुबह जिला पंचायत कार्यालय पहुँचीं।

जिला सीईओ अभिजीत पठारे ने शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए तत्काल मामले की जांच के आदेश दे दिए।




सीईओ ने दिखाया मानवता का चेहरा: भोजन और वाहन की व्यवस्था कर वापस भेजा

लगभग 100 किमी दूर से आए इन ग्रामीण परिवारों की स्थिति को देखकर जिला पंचायत सीईओ ने न सिर्फ उन्हें आश्वासन दिया, बल्कि भोजन की व्यवस्था कराई और उनके गाँव मडियाकछार लौटने के लिए वाहन भी उपलब्ध कराया।

प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता का यह उदाहरण ग्रामीणों के लिए राहत का कारण बना।




पंचायत सचिव के खिलाफ जल्द होगी कड़ी कार्रवाई

जिला पंचायत प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पीएम आवास जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार सहन नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं और जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित पंचायत सचिव पर कड़ी departmental कार्रवाई तय मानी जा रही है।




योजना में गड़बड़ियों ने उठाए सवाल

मडियाकछार की यह घटना उन दर्जनों मामलों में से एक है, जिनमें सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्राम स्तर पर पारदर्शिता और निगरानी की कमी उजागर होती है। सवाल यह है कि—

तीन साल तक निर्माण रुका, इसकी निगरानी किसने की?

जारी की गई किस्तों की पुष्टि किस स्तर पर हुई?

पंचायत सचिव को unchecked तरीके से राशि निकालने की अनुमति कैसे मिली?


ये सवाल अब प्रशासन की जवाबदेही पर भी उंगली उठाते हैं।




एक तरफ प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों को पक्का घर देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर मडियाकछार जैसा मामला यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार कैसे जनता के सपनों को अधूरा छोड़ देता है।

फिलहाल जांच शुरू हो चुकी है और ग्रामीणों को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा तथा दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

समाचार सहयोगी सतीश चौहान

Amar Chouhan

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