सार्वजनिक पानी टंकी की प्रस्तावित जमीन पर निर्माण को लेकर विवाद, पंचायत ने प्रशासन से मांगा हस्तक्षेप

झाकादरहा में खसरा नंबर 85 की भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला पहुंचा एसडीएम के पास, सीमांकन कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग
घरघोड़ा। ग्रामीणों को पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित सार्वजनिक पानी टंकी की जमीन को लेकर झाकादरहा में विवाद की स्थिति सामने आई है। ग्राम पंचायत झारियापाली ने आश्रित ग्राम झाकादरहा में स्थित खसरा नंबर 85 की भूमि पर कथित अतिक्रमण और निर्माण कार्य किए जाने की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), घरघोड़ा से की है। पंचायत ने प्रशासन से मामले का स्थल निरीक्षण कराने, राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि का सीमांकन करने और जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
ग्राम पंचायत की ओर से एसडीएम को सौंपे गए आवेदन में ग्रामीण जितेंद्र जनसेना, पिता संतराम जनसेना द्वारा उक्त भूमि पर निर्माण कार्य किए जाने का आरोप लगाया गया है। पंचायत का कहना है कि खसरा नंबर 85 की संबंधित भूमि सार्वजनिक पानी टंकी के लिए निर्धारित है। ऐसे में यदि इस जमीन पर निजी निर्माण या अतिक्रमण होता है, तो भविष्य में ग्रामीणों के लिए पेयजल व्यवस्था विकसित करने की योजना प्रभावित हो सकती है।
सार्वजनिक उपयोग की जमीन को लेकर पंचायत ने जताई चिंता
पंचायत की शिकायत का मुख्य आधार यह है कि संबंधित भूमि किसी निजी उपयोग के बजाय ग्रामीणों की सामूहिक सुविधा से जुड़ी हुई है। सार्वजनिक पानी टंकी का निर्माण गांव की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में प्रस्तावित स्थल पर निर्माण की स्थिति को लेकर पंचायत ने आपत्ति जताई है।
पंचायत का मानना है कि सार्वजनिक प्रयोजन के लिए निर्धारित भूमि की स्थिति समय रहते स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि भविष्य में ग्रामीणों को पेयजल सुविधा से वंचित न होना पड़े और भूमि को लेकर किसी प्रकार का विवाद न बढ़े।
सीमांकन के साथ मौके पर जांच कराने की मांग
मामले में ग्राम पंचायत ने राजस्व विभाग से केवल शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय अभिलेखीय और भौतिक स्थिति का मिलान कराने की मांग की है। इसके तहत खसरा नंबर 85 का राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सीमांकन, संबंधित स्थल का निरीक्षण तथा पानी टंकी के लिए भूमि निर्धारित किए जाने से जुड़े तथ्यों की जांच कराने का आग्रह किया गया है।
पंचायत ने प्रशासन से यह भी अपेक्षा जताई है कि जांच के दौरान निर्माण कार्य की स्थिति, भूमि का वास्तविक स्वरूप और उसके सार्वजनिक उपयोग से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया जाए। यदि जांच में सरकारी या सार्वजनिक प्रयोजन की भूमि पर अनधिकृत कब्जे अथवा अवैध निर्माण की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत अतिक्रमण हटाने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब राजस्व जांच पर टिकी ग्रामीणों की नजर
झाकादरहा का यह मामला केवल जमीन के सीमांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की भविष्य की पेयजल व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों के हित में प्रस्तावित पानी टंकी के लिए जमीन सुरक्षित रहना जरूरी है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध जांच और वस्तुस्थिति स्पष्ट होने से विवाद की स्थिति को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
फिलहाल ग्राम पंचायत की शिकायत पर राजस्व विभाग की ओर से की जाने वाली जांच और आगामी कार्रवाई का इंतजार है। यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए अतिक्रमण के आरोप अभी शिकायत के स्तर पर हैं। भूमि की वास्तविक स्थिति, निर्माण की वैधानिकता और आरोपों की पुष्टि राजस्व विभाग के सीमांकन एवं जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित व्यक्ति का पक्ष और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आना शेष है।
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