खेत बेचकर जुटाए 11.60 लाख रुपये डिजिटल टोकन में लगाए, मुनाफा तो दूर मूलधन भी नहीं मिला; तीन गिरफ्तार

यूनिटी मेटा टोकन और बीड क्वाइन में मोटे मुनाफे का झांसा देने का आरोप, बैंक खातों के लेन-देन से खुली ठगी की परतें; ओडिशा से मुंबई तक जुड़े संपर्कों की जांच में जुटी साइबर पुलिस
रायगढ़। कम समय में मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद में एक युवक ने अपनी जमीन बेचकर 11 लाख 60 हजार रुपये निवेश कर दिए। उसे भरोसा दिलाया गया था कि यूनिटी मेटा टोकन और बीड क्वाइन में पैसा लगाने से अच्छा रिटर्न मिलेगा। लेकिन निवेश के बाद न तो कथित मुनाफा मिला और न ही उसकी मूल रकम वापस हुई। आखिरकार युवक को पुलिस की शरण लेनी पड़ी। मामले की जांच के बाद रायगढ़ साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला डिजिटल टोकन में निवेश के नाम पर कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा है। शुरुआती जांच में बैंक खातों के जरिए रकम के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। वहीं, मामले के मुख्य आरोपी के पुराने धोखाधड़ी प्रकरण और ओडिशा तथा मुंबई तक बताए जा रहे संपर्कों की भी जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि निवेश के नाम पर प्राप्त रकम आखिर किन-किन लोगों तक पहुंची।
परिचय का भरोसा बना निवेश का आधार
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता विक्रम परिडा (26), मूल निवासी जिला गंजाम, ओडिशा, वर्तमान में रायगढ़ के चक्रधरनगर क्षेत्र के कसेर पारा में रहता है। वह वर्ष 2024 से रायगढ़ में रह रहा था। इसी दौरान उसकी पहचान गजुला मोहन से हुई, जो चक्रधरनगर क्षेत्र की एक फास्ट फूड दुकान में कुक का काम करता था।
आरोप है कि गजुला मोहन ने यूनिटी मेटा टोकन और बीड क्वाइन में निवेश करने की बात कही। उसने स्वयं इस तरह के निवेश से लाभ कमाने का दावा करते हुए विक्रम को भी अधिक मुनाफे की उम्मीद दिखाई। उसकी बातों पर भरोसा करके विक्रम ने निवेश का फैसला किया।
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 25 जुलाई 2024 से 3 सितंबर 2024 के बीच विक्रम ने कुल 11 लाख 60 हजार रुपये निवेश किए। इस रकम की व्यवस्था उसने अपना खेत बेचकर की थी। जिस पैसे से उसने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की उम्मीद लगाई थी, वही रकम वापस नहीं मिलने पर मामला गंभीर हो गया।
बैंक खाते के जरिए रकम के लेन-देन की जांच
शिकायत में बताया गया कि निवेश के लिए रकम प्राप्त करने के दौरान चंदन दास के माध्यम से बीड क्वाइन से जुड़े कार्य करने वाले भावेष पटेल के बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया। निवेश के बाद शिकायतकर्ता को कथित तौर पर न तो कोई लाभ मिला और न ही मूलधन वापस किया गया।
बार-बार रकम मांगने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर विक्रम ने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद थाना साइबर, रायगढ़ में अपराध क्रमांक 16/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित बैंक खातों के स्टेटमेंट प्राप्त कर उनका परीक्षण किया। पुलिस का कहना है कि खातों में शिकायतकर्ता और आरोपियों के बीच रकम के लेन-देन से संबंधित जानकारी मिली। इसके अतिरिक्त, आरोपियों के मोबाइल फोन भी जांच में शामिल किए गए हैं।
मुख्य आरोपी पर पहले भी दर्ज हो चुका है मामला
पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण के मुख्य आरोपी गजुला मोहन के विरुद्ध वर्ष 2025 में भी चक्रधरनगर थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। उस प्रकरण में विवेकानंद राउत, देवेंद्र महापात्रे और शरद जैन से संबंधित शिकायत का उल्लेख किया गया है।
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पुराने मामले में न्यायालय से स्टे प्राप्त करने के बाद आरोपी फरार चल रहा था। हालांकि, उस प्रकरण की वर्तमान स्थिति और न्यायालय के आदेश की विस्तृत जानकारी विज्ञप्ति में नहीं दी गई है। पुलिस पुराने मामले से जुड़े तथ्यों और मौजूदा प्रकरण में आरोपी की कथित भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
ओडिशा और मुंबई तक जुड़े संपर्कों की पड़ताल
साइबर पुलिस की जांच अब केवल शिकायतकर्ता से प्राप्त रकम तक सीमित नहीं है। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी के संपर्क ओडिशा और मुंबई तक होने तथा रकम आगे अन्य लोगों तक भेजे जाने से संबंधित जानकारी मिली है।
जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि निवेश के नाम पर प्राप्त रकम किन खातों में पहुंची, उसका आगे किस तरह इस्तेमाल किया गया और इस पूरे लेन-देन में अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही कथित नेटवर्क की वास्तविक सीमा स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल पुलिस ने इस संबंध में विस्तृत जांच जारी होने की जानकारी दी है। इसलिए अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता और रकम के अंतिम गंतव्य को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
तीन आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक रिमांड पर भेजे गए
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है—
1. गजुला मोहन (45), निवासी जिला गंजाम, ओडिशा, वर्तमान निवासी हिमालया हाइट्स, संजय नगर, थाना चक्रधरनगर, रायगढ़।
2. चंदन दास (33), निवासी जगतसिंहपुर, ओडिशा, वर्तमान निवासी रायगढ़ स्टेडियम के पास, थाना चक्रधरनगर, रायगढ़।
3. भावेष पटेल (28), निवासी कारीछापर, थाना पुसौर, जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया है। हालांकि, किसी भी आरोपी के विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
एसएसपी के निर्देशन में हुई कार्रवाई
रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात पुष्पेंद्र बघेल के मार्गदर्शन में साइबर पुलिस ने कार्रवाई की।
प्रकरण की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, निरीक्षक विमल राय, सहायक उप निरीक्षक नंद कुमार सारथी, सहायक उप निरीक्षक ज्योत्सना शर्मा, प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह, रूप राम पटेल तथा आरक्षक पुष्पेंद्र जाटवर की भूमिका बताई गई है।
एसएसपी की अपील—असाधारण मुनाफे के वादों से रहें सावधान
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल करेंसी, क्रिप्टो टोकन अथवा किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, विश्वसनीयता और संबंधित संस्था की प्रमाणिकता की जांच करें।
उन्होंने कम समय में रकम दोगुनी करने या असाधारण मुनाफा दिलाने के वादों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करने की सलाह दी है। साथ ही, किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपनी मेहनत की कमाई या संपत्ति बेचकर निवेश करने से बचने को कहा है।
वित्तीय साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर नागरिकों को तत्काल पुलिस को सूचना देने और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह भी दी गई है।
मामला क्या संदेश देता है?
रायगढ़ का यह प्रकरण निवेश के नाम पर किए जाने वाले उन वादों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत बताता है, जिनमें कम समय में असाधारण लाभ का भरोसा दिलाया जाता है। किसी डिजिटल टोकन का नाम, आकर्षक मुनाफे का दावा या परिचित व्यक्ति की सिफारिश अपने आप में निवेश की विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं है।
इस मामले में अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि रकम का पूरा प्रवाह क्या था, कथित निवेश योजना की वास्तविक प्रकृति क्या थी और क्या अन्य लोग भी इसमें शामिल थे। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद पीड़ित की रकम की बरामदगी और कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी का खुलासा आगे की जांच के महत्वपूर्ण बिंदु रहेंगे।
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