शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का झांसा, ग्रामीण महिलाओं से 70.77 लाख रुपये की ठगी का आरोप; मुख्य आरोपी मिनकेतन सिदार गिरफ्तार


रायगढ़ साइबर पुलिस की जांच में सामने आई कथित निवेश योजना की परतें, शुरुआती भुगतान से जीता भरोसा, बाद में मूलधन लौटाने में भी खड़े किए हाथ
पुसौर-तमनार क्षेत्र का मामला: 10 महिलाओं से लाखों रुपये लेने की शिकायत, महिला आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस मुख्य आरोपी तक पहुंची; अन्य आरोपियों की तलाश जारी
रायगढ़। शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में रकम दोगुनी करने और मोटा मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर ग्रामीण महिलाओं से लाखों रुपये लेने के मामले में रायगढ़ पुलिस ने मुख्य आरोपी मिनकेतन सिदार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में कुल 70 लाख 77 हजार 901 रुपये की राशि लेने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि निवेश के नाम पर महिलाओं से रकम जुटाई गई, शुरुआत में कुछ लोगों को भुगतान कर विश्वास कायम किया गया, लेकिन बाद में न तो वादे के मुताबिक मुनाफा मिला और न ही मूलधन वापस किया गया।
साइबर थाना रायगढ़ की टीम ने तमनार क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए ग्राम आमगांव निवासी मिनकेतन सिदार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कथित तौर पर अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन जब्त किया है और उसके बैंक खाते से संबंधित जानकारी भी जुटाई है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।
मुनाफे की बातों में आया भरोसा, धीरे-धीरे बढ़ती गई निवेश की रकम
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मामला पुसौर थाना क्षेत्र के ग्राम जतरी और आसपास के गांवों की महिलाओं से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं में ग्राम जतरी निवासी हारा बाई निषाद (36 वर्ष) सहित अन्य महिलाएं शामिल हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मेनका सारथी अपने मायके आने पर गांव की महिलाओं को शेयर बाजार में निवेश से अच्छा मुनाफा होने की बात बताती थी। उसका कहना था कि वह और उसका पति अक्षय सारथी शेयर बाजार में पैसा लगाकर लाभ कमा रहे हैं।
महिलाओं को भरोसा दिलाया गया कि उनके बताए तरीके से रकम निवेश करने पर कम समय में अच्छा मुनाफा मिलेगा और निवेश की राशि दोगुनी तक हो सकती है। शिकायत के मुताबिक, रकम दोगुनी नहीं होने की स्थिति में मेनका और उसके पति ने अपनी गारंटी पर पैसा वापस दिलाने का भरोसा भी दिया था।
इस आश्वासन के बाद महिलाओं ने नकद और ऑनलाइन माध्यम से रकम देना शुरू किया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निवेश की रकम धीरे-धीरे बढ़ती गई और कई महिलाओं ने अपनी जमा-पूंजी तक सौंप दी। कुछ महिलाओं ने दूसरे बैंकों से कर्ज लेकर भी पैसा दिया था। बाद में भुगतान रुकने पर उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया और उन्हें ऋण की किस्तें स्वयं चुकानी पड़ रही थीं।
शिकायत में 10 महिलाओं की रकम का ब्योरा
शिकायत के अनुसार, 6 अप्रैल 2025 से 24 अक्टूबर 2025 के बीच अलग-अलग महिलाओं से निम्नलिखित रकम ली गई थी।
– हारा बाई निषाद — 17 लाख 53 हजार रुपये
– आरती सिदार — 3 लाख रुपये
– अनिता निषाद — 17 लाख 24 हजार रुपये
– दुजकुंवर यादव — 5 लाख रुपये
– सुशीला निषाद — 1 लाख 80 हजार रुपये
– मोहनमती सिदार — 3 लाख 30 हजार रुपये
– मुन्नी बाई सारथी — 3 लाख 40 हजार रुपये
– पुष्पा सिदार — 9 लाख रुपये
– फुलबाई यादव — 3 लाख रुपये
– विष्णु प्रिया निषाद — 7 लाख 50 हजार रुपये
शिकायत में इन महिलाओं के अलावा अन्य लोगों से भी रकम लिए जाने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, पूरे मामले में 70,77,901 रुपये की राशि से संबंधित शिकायत की जांच की जा रही है। यह राशि शिकायत और जांच से जुड़ा आंकड़ा है; अंतिम वित्तीय स्थिति का निर्धारण विवेचना में सामने आने वाले दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
शुरुआत में भुगतान, फिर रकम लौटाने से इनकार करने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, शुरुआत में कुछ निवेशकों को मुनाफे की रकम लौटाई गई। इससे योजना पर उनका भरोसा बढ़ा और अन्य महिलाओं ने भी पैसा देना शुरू कर दिया। हालांकि, बाद के चरण में भुगतान बंद होने लगा।
जब महिलाओं ने अपनी रकम और मुनाफे के संबंध में जानकारी मांगी, तो उन्हें कथित तौर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। शिकायत में आरोप है कि उनकी राशि शेयर बाजार में निवेश करने के बजाय निजी उपयोग में ली गई। रकम वापस मांगने पर कथित रूप से धमकी भी दी गई कि शिकायत करने पर उन्हें जेल भिजवा दिया जाएगा।
इस तरह निवेश के नाम पर शुरू हुआ लेनदेन विवाद बाद में कथित धोखाधड़ी के मामले में बदल गया। जिन महिलाओं ने कर्ज लेकर रकम दी थी, उनके लिए परेशानी और बढ़ गई, क्योंकि निवेश से अपेक्षित आय नहीं हुई, जबकि ऋण चुकाने की जिम्मेदारी बनी रही।
22 जुलाई को दर्ज हुआ अपराध, बैंक खातों की जांच से बढ़ी पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, लेनदेन से जुड़े तथ्यों, शिकायतकर्ताओं के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल के बाद 22 जुलाई 2026 को साइबर थाना रायगढ़ में अपराध क्रमांक 11/2026 दर्ज किया गया।
प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मेनका सारथी, उसके पति अक्षय सारथी और मीरा सोनवानी के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ित महिलाओं और आरोपियों के बैंक खातों से संबंधित जानकारी जुटाई। पुलिस के मुताबिक, मेनका सारथी के तीन अलग-अलग बैंक खातों में लाखों रुपये के लेनदेन का पता चला। बैंक ट्रांजेक्शन, शिकायतकर्ताओं के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।
इसी क्रम में पुलिस टीम ने 6 अक्टूबर 2026 को जिला सक्ती के ग्राम बरतुंगा में दबिश देकर मेनका सारथी को हिरासत में लिया था। उससे पूछताछ के दौरान कथित निवेश योजना में अन्य लोगों की भूमिका के संबंध में जानकारी सामने आई।
मेनका से पूछताछ के बाद मिनकेतन की भूमिका सामने आने का दावा
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में मेनका सारथी ने बताया कि वह पहले रायगढ़ के ढिमरापुर क्षेत्र में किराये के मकान में रहती थी। इसी दौरान उसकी पहचान मिनकेतन सिदार से हुई थी। पुलिस का दावा है कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मिनकेतन की भूमिका इस कथित निवेश योजना में सामने आई।
जांच के मुताबिक, लोगों से निवेश के नाम पर रकम जुटाने की योजना बनाने में मिनकेतन की भूमिका होने का आरोप है। पुलिस का यह भी कहना है कि मेनका ने अपने पति अक्षय सारथी और मां मीरा सोनवानी को इस गतिविधि में शामिल किया था।
आरोप है कि अक्षय सारथी निवेश पर अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाने और रकम के लेनदेन से संबंधित जानकारी रखने में भूमिका निभाता था। वहीं, मीरा सोनवानी पर महिलाओं को निवेश के लिए प्रेरित करने, नकद रकम लेने और उसे बैंक खातों में जमा कराने में सहयोग करने का आरोप है। इन सभी आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होनी है।
पुलिस के मुताबिक, महिलाओं से प्राप्त रकम का लेनदेन अलग-अलग लोगों के माध्यम से किया जाता था। शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को रकम लौटाई गई, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया। मेनका सारथी के कब्जे से पहले ही मोबाइल फोन, तीन बैंक खातों से संबंधित जानकारी और एटीएम कार्ड जब्त किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी थी।
तमनार क्षेत्र में दबिश देकर मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
मेनका सारथी से पूछताछ के बाद पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी थी। इसी दौरान साइबर थाना पुलिस को मिनकेतन सिदार के संबंध में जानकारी मिली। पुलिस टीम ने तमनार क्षेत्र में दबिश दी और आरोपी को उसके गांव के पास से हिरासत में लिया।
पूछताछ के बाद आरोपी के कब्जे से अपराध में कथित तौर पर प्रयुक्त एक मोबाइल फोन जब्त किया गया। साथ ही, उसके बैंक खाते से संबंधित जानकारी जुटाई गई। पुलिस के अनुसार, मामले में संलिप्तता से जुड़े साक्ष्य मिलने पर मिनकेतन सिदार को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान मिनकेतन सिदार, पिता ब्रह्मा सिदार, उम्र 40 वर्ष, निवासी ग्राम आमगांव, थाना तमनार, जिला रायगढ़ के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
निवेश के नाम पर रकम देने वालों के लिए फिर सामने आई सतर्कता की जरूरत
यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश और अधिक मुनाफे के नाम पर लोगों को भरोसे में लेने के आरोपों की गंभीरता को सामने लाता है। कम समय में रकम दोगुनी करने, निश्चित लाभ देने या निजी गारंटी पर बड़ी रकम लौटाने जैसे दावों पर बिना दस्तावेजी जांच के भरोसा करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
हालांकि, किसी निवेश प्रस्ताव की वास्तविकता समझने के लिए उसके दस्तावेज, संबंधित संस्था की वैधता, रकम प्राप्त करने वाले व्यक्ति की पहचान और लेनदेन का रिकॉर्ड जांचना जरूरी है। किसी व्यक्ति के मौखिक आश्वासन या शुरुआती भुगतान को अपने आप में सुरक्षित निवेश का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
फिलहाल, रायगढ़ पुलिस इस मामले में वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। शिकायत में दर्ज रकम, प्रत्येक आरोपी की भूमिका और कथित धोखाधड़ी से जुड़े सभी पहलुओं का अंतिम निर्धारण विवेचना तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। पुलिस के अनुसार, मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी शेष है।
संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई प्रेस विज्ञप्ति और उसमें वर्णित शिकायत एवं जांच के तथ्यों पर आधारित है। आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध किया जाना शेष है।
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