नंदेली की त्रासदी: बारिश में ढहा कच्चा मकान, एक मौत… और आवास व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल


Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़। जिले के पुसौर ब्लॉक के नंदेली गांव में शनिवार देर रात हुई एक दर्दनाक घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि ग्रामीण आवास व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कच्चा और जर्जर मकान भरभराकर गिरने से 40 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि उसका पति और नाबालिग बेटा गंभीर रूप से घायल हैं। यह हादसा सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि व्यवस्था और प्राथमिकताओं की परतें भी खोलता है।
रात 3 बजे का हादसा, गांव में मचा हड़कंप
घटना पुसौर थाना क्षेत्र के नंदेली गांव के महंत पारा की है। रात करीब 3 बजे परिवार के तीनों सदस्य घर में सो रहे थे, तभी लगातार बारिश से कमजोर पड़ा कच्चा मकान अचानक ढह गया। मलबे में दबे रोहिणी महंत, उनके पति रतन महंत और 13 वर्षीय बेटे शिवम को ग्रामीणों ने किसी तरह बाहर निकाला।
स्थानीय लोगों की तत्परता और डायल-112 की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन रोहिणी महंत ने रायगढ़ ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। पति और पुत्र का इलाज जारी है, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
बारिश बनी कारण या लापरवाही की परत?
पिछले 2-3 दिनों से क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी। ग्रामीणों के अनुसार मकान पहले से जर्जर था, जिसकी दीवारें और छत कमजोर हो चुकी थीं। ऐसे में यह हादसा होना लगभग तय था—सवाल सिर्फ समय का था।
लेकिन यहीं से कहानी सिर्फ “बारिश से हादसा” नहीं रह जाती।
कागज़ी प्रगति बनाम जमीनी सच्चाई
नंदेली की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब सरकारी स्तर पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत “पूर्णता” और “जियो-ट्रैकिंग” के आंकड़ों को लेकर लगातार उपलब्धियां गिनाई जाती हैं। कागजों में लक्ष्य पूरे होते दिखते हैं, लेकिन जमीन पर कई परिवार अब भी जर्जर कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का साफ कहना है—
> “अगर समय पर पक्का मकान बन जाता, तो आज यह हादसा नहीं होता।”
यह बयान केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उस खाई की ओर इशारा करता है जो आंकड़ों और वास्तविक जरूरत के बीच मौजूद है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
क्या आवास योजना का उद्देश्य केवल लक्ष्य और जियो-ट्रैकिंग पूरा करना है?
क्या वास्तविक रूप से जोखिम में रह रहे परिवारों की पहचान प्राथमिकता में है?
क्या अधूरे स्वीकृत मकानों की नियमित समीक्षा हो रही है?
नंदेली की घटना इन सवालों को और तीखा कर देती है।
जांच और जवाबदेही की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि पुसौर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत लेकिन अधूरे मकानों की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए। विशेष रूप से उन परिवारों की पहचान हो, जो आज भी खतरे वाले मकानों में जीवन बिता रहे हैं।
यह मांग केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में ठोस कार्रवाई की अपेक्षा है।
प्रशासन के लिए चेतावनी
नंदेली की यह त्रासदी एक स्पष्ट संकेत है—
यदि कागजी उपलब्धियों और जमीनी जरूरतों के बीच की दूरी कम नहीं की गई, तो ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे।
अब निगाहें जिला पंचायत रायगढ़ और जनपद पंचायत पुसौर पर हैं कि वे इस घटना को सिर्फ एक “प्रकरण” मानते हैं या इसे सुधार की शुरुआत बनाते हैं।
(नोट: खबर उपलब्ध तथ्यों और स्थानीय जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कुछ तथ्य परिवर्तित हो सकते हैं।)
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