जंगल में फंसी गाड़ी ने खोली लकड़ी तस्करी की परतें, जंगल में माजदा वाहन सहित भारी मात्रा में लकड़ी जब्त


Journalist Amardeep Chauhan
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धरमजयगढ़/छाल। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज में अवैध लकड़ी परिवहन का एक मामला उस वक्त उजागर हो गया, जब तस्करों की गाड़ी खुद जंगल में ही जवाब दे गई। औरानारा जंगल के कम्पार्टमेंट क्रमांक 525 में आम और महुआ की हरी लकड़ियों से लदा माजदा वाहन तकनीकी खराबी के कारण बीच जंगल में फंस गया और यही चूक वन विभाग के लिए कार्रवाई का मौका बन गई।
जानकारी के अनुसार, संदिग्ध वाहन काफी देर तक जंगल के भीतर ही खड़ा रहा। बाहर निकालने की कोशिशें नाकाम रहीं तो इसकी भनक वन अमले तक पहुंची। मौके पर पहुंची टीम ने जब जांच की, तो वाहन में बड़ी मात्रा में ताजा काटी गई लकड़ी भरी मिली। प्राथमिक जांच में लकड़ियों के अवैध रूप से कटान और परिवहन की आशंका जताई गई है।
वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वाहन और लकड़ियों को जब्त कर लिया। चालक और सह-चालक से पूछताछ के आधार पर प्राइमरी ऑफेंस रिपोर्ट (POR) दर्ज की गई है। ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचनामा तैयार कर लिया गया है और अब विभाग वाहन को राजसात करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब जब्त लकड़ियों को लेकर क्षेत्र के एक रसूखदार व्यक्ति का नाम सामने आया। वन अमले के मुताबिक, पूछताछ के दौरान संबंधित व्यक्ति ने नियमों को लेकर उलट दलील देते हुए दावा किया कि आम और महुआ की लकड़ी के परिवहन के लिए ट्रांजिट परमिट (टीपी) की आवश्यकता नहीं होती। अधिकारियों के सामने इस तरह का तर्क दिए जाने के बाद पूरे प्रकरण ने गंभीरता और बढ़ा दी है।
वन विभाग फिलहाल इस दावे की विधिक जांच कर रहा है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि लकड़ियां किन पेड़ों से और किस क्षेत्र से काटी गईं तथा उनका अंतिम गंतव्य क्या था। विभागीय सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों की पड़ताल और बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
छाल रेंज के रेंजर आर. के. चौहान ने बताया कि जब्त लकड़ियों की वैधता की विस्तृत जांच की जा रही है और तथ्य सामने आने के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, जंगल में फंसी एक गाड़ी ने संभावित तस्करी के बड़े नेटवर्क की परतें खोल दी हैं, जिसकी कड़ियां अब धीरे-धीरे जोड़ी जा रही हैं।
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