नशीली चाय, धमकी और ब्लैकमेल: दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, डिजिटल सबूत बने अहम

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 22 फरवरी 2026। औद्योगिक क्षेत्र पूंजीपथरा से सामने आए दुष्कर्म और डिजिटल ब्लैकमेल के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में की गई, जिसे पुलिस महकमे की संवेदनशीलता और तात्कालिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, 32 वर्षीय पंकज गोपाल उर्फ पंकज यादव पूंजीपथरा क्षेत्र स्थित सिंघल गेट ईंटा प्लांट, बंजारी में सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत था। आरोप है कि उसने पीड़िता को विश्वास में लेकर पहले नशीली चाय पिलाई और फिर धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना यहीं तक सीमित नहीं रही — आरोपी ने मोबाइल से आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे पीड़िता और उसके परिवार को भेजने की कोशिश की, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
शिकायत मिलने के बाद थाना पूंजीपथरा पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों को प्राथमिकता देते हुए आरोपी का मोबाइल जब्त किया गया, जिसमें कथित वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री बरामद हुई। इसी आधार पर प्रकरण में आईटी एक्ट की धारा 66(डी) और 67(ए) जोड़ी गई, जो साइबर माध्यम से उत्पीड़न और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार से संबंधित हैं।
कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश मिश्रा के नेतृत्व में उप निरीक्षक विजय एक्का तथा आरक्षक फिल्मोन एक्का, विक्रम कुजूर और हेमसागर पटेल की टीम शामिल रही। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य इस मामले में जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हुए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अपराध का स्वरूप अब केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल माध्यमों के जरिए दबाव और ब्लैकमेल की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि पुलिस अब पारंपरिक जांच के साथ तकनीकी साक्ष्यों पर भी बराबर जोर दे रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का स्पष्ट संदेश है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उनका कहना है कि त्वरित कार्रवाई, साक्ष्य आधारित जांच और कठोर वैधानिक प्रक्रिया ही पीड़ितों को न्याय दिलाने का भरोसा मजबूत करती है।
पूंजीपथरा का यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि कार्यस्थलों पर सुरक्षा, विश्वास और जवाबदेही की जरूरत पहले से अधिक बढ़ गई है। साथ ही यह भी कि अपराध चाहे किसी भी रूप में हो — कानून की पहुंच अब डिजिटल दुनिया तक उतनी ही सख्ती से है, जितनी जमीन पर।