घाट का खतरनाक मोड़ और तेज रफ्तार की टक्कर: चिपटापानी हादसे ने फिर जगाई सड़क सुरक्षा की चिंता
Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

घरघोड़ा/रायगढ़।
लैलूंगा मार्ग पर स्थित चिपटापानी घाट एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही की भेंट चढ़ गया। दोपहर लगभग तीन से चार बजे के बीच हुए दर्दनाक सड़क हादसे में बैसकीमुड़ा निवासी दंपत्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। घाट के तीखे मोड़ों और भारी वाहनों की बेलगाम गति को लेकर पहले से उठते रहे सवाल इस घटना के बाद और तेज हो गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लैलूंगा की दिशा से आ रहा ट्रक तेज रफ्तार में घाट उतर रहा था। मोड़ पर पहुंचते ही चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और सामने से आ रही कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और कुछ देर के लिए पूरा मार्ग थम सा गया। आसपास मौजूद लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे और घायलों को वाहन से बाहर निकालने की कोशिश शुरू की।
हादसे में महिला के हाथ और पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है, जबकि पति को पैर और सीने में गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं। चिकित्सकों ने पति की स्थिति को नाजुक बताते हुए सतत निगरानी में रखने की बात कही है। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को बेहतर चिकित्सा के लिए रायगढ़ रेफर किया गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय ग्रामीणों के साथ राहत कार्य शुरू किया। संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घटनास्थल से गुजर रहे जशपुर जिले के डीएसपी (सुरक्षा/ट्रैफिक) श्री के.आर. चौहान, रक्षित निरीक्षक श्री अमरजीत खूँटे तथा पुलिस स्टाफ ने तत्काल अपने वाहन से घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। समय पर मिली इस सहायता को स्थानीय लोग राहत की बड़ी वजह मान रहे हैं।
दुर्घटना के बाद ट्रक को जब्त कर थाने में खड़ा कराया गया है और पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गई है। प्रारंभिक स्तर पर तेज रफ्तार और घाट मार्ग की जोखिमपूर्ण परिस्थितियों को हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
दरअसल चिपटापानी घाट लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित क्षेत्र रहा है। तीखे मोड़, ढलान और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही यहां जोखिम बढ़ाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चेतावनी संकेत, स्पीड मॉनिटरिंग और नियमित ट्रैफिक पेट्रोलिंग की कमी के कारण हालात जस के तस बने हुए हैं।
हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से घाट क्षेत्र में स्पीड कंट्रोल उपाय, रिफ्लेक्टर युक्त संकेतक, सीसीटीवी निगरानी और भारी वाहनों के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू करने की मांग दोहराई है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी घटनाएं आगे भी दोहराई जा सकती हैं।
इस बीच पुलिस अधिकारियों की तत्परता की स्थानीय स्तर पर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि दुर्घटना के बाद जिस तेजी से मदद पहुंची, उसने गंभीर स्थिति में फंसे दंपत्ति के उपचार को संभव बनाया। चिपटापानी घाट की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर पुनर्विचार की जरूरत का संकेत भी है।