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कोयला रायगढ़ का, उजड़ते जंगल रायगढ़ के… तो बिजली दरों का बोझ भी क्यों रायगढ़ पर?

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़।
धरती से निकलता कोयला, आसमान में घुलती राख, सूखते जलस्रोत और सिकुड़ती हरियाली—यह दृश्य अब यहां की पहचान बन चुका है। रायगढ़ केवल एक जिला नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन की राष्ट्रीय श्रृंखला का अहम केंद्र है। यहां की खदानों से निकला कोयला देश के कई ताप विद्युत संयंत्रों को जीवन देता है।

पर सवाल वही है—जब संसाधन हमारे, असर हमारा, तो महंगी बिजली का बोझ भी हम पर ही क्यों?

18 फरवरी को आयोजित जन सुनवाई में प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि पर शहर में उबाल साफ दिखाई दे रहा है। सामाजिक संगठन, व्यापारी वर्ग, पर्यावरण समूह और आम नागरिक बड़ी संख्या में अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी में हैं।

प्रदूषण का दंश, अब आर्थिक दबाव

खनन और औद्योगिक गतिविधियों ने रायगढ़ को आर्थिक पहचान दी है, लेकिन इसके साथ धूल, शोर, जल दोहन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ी हैं। स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि जिन इलाकों से कोयला निकाला जाता है, वहां के लोगों को कम से कम बिजली दरों में राहत मिलनी चाहिए।

मध्यमवर्गीय परिवार, छोटे दुकानदार और लघु उद्योग पहले से महंगाई की मार झेल रहे हैं। ऐसे में टैरिफ वृद्धि सीधे उनके बजट पर चोट करेगी।

जन सुनवाई: आपकी आवाज का मंच

जन सुनवाई लोकतंत्र की वह खिड़की है जहां से आम नागरिक अपनी बात सीधे नियामक संस्था तक पहुंचा सकता है। यह केवल औपचारिकता न बने, इसके लिए आवश्यक है कि अधिक से अधिक लोग अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

संगठनों द्वारा ज्ञापन, लिखित आपत्तियां और तथ्यात्मक प्रस्तुति तैयार की गई है। मांग यह है कि स्थानीय संसाधनों से उत्पादन करने वाली इकाइयों के बीच आम उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है।

ऑनलाइन जनसुनवाई में कैसे भाग लें?

जो नागरिक किसी कारणवश स्थल पर उपस्थित नहीं हो सकते, वे ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। सामान्यतः प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

1️⃣ आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं

http://www.cserc.gov.in

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) की आधिकारिक वेबसाइट पर “Public Hearing” या “Tariff Petition” सेक्शन देखें।

2️⃣ आपत्ति/सुझाव दर्ज करें

निर्धारित प्रारूप (Format) में अपनी आपत्ति लिखें।

नाम, पता, उपभोक्ता क्रमांक (यदि उपलब्ध हो) अवश्य दर्ज करें।

तथ्यात्मक बिंदु और स्पष्ट मांग लिखें।


3️⃣ ई-मेल या ऑनलाइन फॉर्म से सबमिट करें

आयोग द्वारा जारी ई-मेल आईडी या ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से अपनी आपत्ति भेजी जा सकती है।
अक्सर अंतिम तिथि तय होती है—इसलिए समयसीमा का ध्यान रखें।

4️⃣ वर्चुअल उपस्थिति (यदि सुविधा हो)

कुछ मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी प्रस्तुति का अवसर दिया जाता है। इसके लिए पहले से पंजीयन (Registration) करना आवश्यक होता है।

क्यों जरूरी है भागीदारी?

अगर स्थानीय लोग अपनी बात नहीं रखेंगे, तो निर्णय केवल कागजों पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर होंगे। जन सुनवाई में भाग लेना केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है—ताकि संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग और दर निर्धारण में स्थानीय हितों की अनदेखी न हो।

अंतिम सवाल

रायगढ़ देश को रोशनी देता है—यह गर्व की बात है।
लेकिन क्या उस रोशनी की कीमत रायगढ़ की जनता ही बार-बार चुकाती रहे?

आज की जन सुनवाई इसी प्रश्न का जवाब तलाशने का अवसर है।
अपनी आवाज दर्ज कराइए—चाहे मंच पर उपस्थित होकर, या ऑनलाइन माध्यम से।

Amar Chouhan

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