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कुसमी की रात, सवालों के घेरे में प्रशासन: अवैध खनन की कार्रवाई के बीच ग्रामीण की मौत से सियासी भूचाल

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

बलरामपुर-रामानुजगंज, 16 फरवरी।
सरगुजा संभाग के शांत माने जाने वाले कुसमी अंचल की बीती रात अचानक उथल-पुथल में बदल गई। अवैध बॉक्साइट खनन की शिकायत पर पहुंची प्रशासनिक टीम की कार्रवाई के दौरान एक ग्रामीण की मौत ने पूरे इलाके को तनाव की आगोश में ला दिया है। आरोपों के केंद्र में हैं कुसमी के एसडीएम करुण डहरिया, जिन पर कथित मारपीट का गंभीर आरोप लगा है।

हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन घटना ने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।



क्या हुआ उस रात?

जानकारी के अनुसार, करौँधा-बरपाठ क्षेत्र में अवैध बॉक्साइट खनन की शिकायत पर एसडीएम अपनी टीम के साथ देर रात मौके पर पहुंचे। उनके साथ तहसीलदार और अन्य राजस्व अमला मौजूद था। बताया जा रहा है कि इसी दौरान हँसपुर गांव के एक ग्रामीण के साथ तीखी झड़प हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि विवाद बढ़ा और कथित तौर पर मारपीट की स्थिति बनी। कुछ अन्य ग्रामीणों के घायल होने की भी सूचना है। गंभीर रूप से घायल ग्रामीण को अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। शव फिलहाल कुसमी अस्पताल में रखा गया है।



प्रशासनिक हलचल और जांच

घटना के बाद हालात तेजी से बदले। कुसमी थाना परिसर में एसडीएम से पूछताछ की जा रही है। जिला पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट कहा है कि यदि जांच में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई होगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।

एसडीओपी और थाना प्रभारी को तत्काल मौके पर भेजा गया है। पूरे मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी गई है।



अवैध खनन की पृष्ठभूमि

कुसमी और उससे सटे इलाकों में लंबे समय से बॉक्साइट के अवैध उत्खनन की शिकायतें आती रही हैं। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है, लेकिन खनन माफिया के प्रभाव और स्थानीय नेटवर्क के चलते समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई।

बीती रात की कार्रवाई भी इसी कड़ी का हिस्सा बताई जा रही है। सवाल यह है कि यदि कार्रवाई कानूनसम्मत थी, तो हालात इतने बिगड़े कैसे? और यदि वाकई बल प्रयोग हुआ, तो उसकी सीमा क्या थी?



गांव में आक्रोश, हालात संवेदनशील

ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। मृतक के परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है, हालांकि प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई भी अधिकारी कानून से ऊपर समझने लगे तो व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पूरी सच्चाई सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।



सवाल जो जवाब मांग रहे हैं

क्या कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ?

क्या मौके पर पुलिस बल पर्याप्त था?

क्या विवाद को संवाद से सुलझाया जा सकता था?

अवैध खनन के खिलाफ सख्ती और मानवाधिकारों के संतुलन की रेखा कहां खिंचती है?




निष्कर्ष से पहले संयम जरूरी

इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम है— निष्पक्ष और पारदर्शी जांच। आरोप गंभीर हैं, लेकिन अंतिम सत्य जांच रिपोर्ट ही तय करेगी।

कुसमी की यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन और आम नागरिक के बीच भरोसे की कसौटी भी है। यदि दोष सिद्ध होता है तो कार्रवाई उदाहरण बने, और यदि आरोप निराधार हों तो तथ्यों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जाए।

फिलहाल कुसमी की फिजा में सन्नाटा है, लेकिन सवालों की गूंज दूर तक सुनाई दे रही है।

Amar Chouhan

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