पॉक्सो मामलों में सख्ती की नई मिसाल: रायगढ़ पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन, पर अभिभावकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 16 फरवरी।
जिले में नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों पर शिकंजा कसने की दिशा में पुलिस की सक्रियता अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। हालिया प्रकरण में घर में घुसकर नाबालिग बालिका से छेड़खानी करने वाले दो आरोपियों की घटना के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि अब ऐसे मामलों में ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जा रही।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में महिला थाना की टीम ने जिस तत्परता से कार्रवाई की, उसने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर पुलिस की नीति अब ‘शून्य सहनशीलता’ की है। महिला थाना प्रभारी उप निरीक्षक दीपिका निर्मलकर के नेतृत्व में गठित टीम ने मेडिकल परीक्षण से लेकर आरोपियों की धरपकड़ तक की पूरी प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की और दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
घटना ने उठाए गंभीर सवाल
घटना 13 फरवरी की रात की है, जब दो युवक घर के पीछे से प्रवेश कर कमरे में सो रही नाबालिग बालिका से छेड़खानी करने लगे। बालिका के शोर मचाने पर परिजन जागे, पड़ोसी भी पहुंचे, लेकिन आरोपी अंधेरे और अफरातफरी का फायदा उठाकर जंगल की ओर भाग निकले।
प्रकरण में महिला थाना में अप.क्र. 10/2026 के तहत बीएनएस की धाराओं एवं पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। पुलिस की त्वरित दबिश में दोनों आरोपी हिरासत में आ गए और पूछताछ में उन्होंने अपराध स्वीकार किया।
पुलिस की सक्रियता, प्रशासन की स्पष्ट मंशा
पिछले कुछ समय से जिले में पॉक्सो से जुड़े मामलों में लगातार और निर्णायक कार्रवाई देखने को मिल रही है। नए एसएसपी के कार्यभार संभालने के बाद यह रुख और स्पष्ट हुआ है कि नाबालिगों से जुड़े अपराधों में समझौते, दबाव या सामाजिक दबंगई को कोई स्थान नहीं दिया जाएगा।
एसएसपी शशि मोहन सिंह का स्पष्ट संदेश है— महिला एवं नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
लेकिन एक कड़वी सच्चाई भी…
कानून अपना काम कर रहा है, पुलिस सक्रिय है, मगर समाज का एक हिस्सा अब भी लापरवाह है। रात में घरों की सुरक्षा, बच्चों की निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों पर सतर्कता— ये सब केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं हो सकती।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कई बार यह देखा गया है कि परिवारजन बच्चों की सुरक्षा को लेकर सहज हो जाते हैं। खुला आंगन, बिना मजबूत दरवाजों वाले कमरे, देर रात तक खुला परिसर— ये परिस्थितियाँ असामाजिक तत्वों को अवसर देती हैं।
आज जरूरत इस बात की है कि—
घरों में रात्रि सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
बच्चों को ‘गुड टच–बैड टच’ की जानकारी दी जाए।
किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए।
सामाजिक शर्म या लोकलाज के कारण मामलों को दबाने की प्रवृत्ति खत्म हो।
समाज और पुलिस की साझा जिम्मेदारी
पॉक्सो कानून कड़ा है, और उसका उद्देश्य नाबालिगों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं होते। जब तक परिवार, समाज और प्रशासन तीनों मिलकर जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाना कठिन होगा।
रायगढ़ पुलिस ने अपनी ओर से यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि कार्रवाई में कोई कोताही नहीं होगी। अब बारी समाज की है— वह भी उतनी ही सजगता दिखाए।
क्योंकि अंततः सुरक्षा सिर्फ कानून की नहीं, संस्कार और सतर्कता की भी मांग करती है।